भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार जारी
आर्थिक मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.7%, चौथी तिमाही में रही 7.8 फीसदी की तेजी
(जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली): पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक उथल-पुथल के कारण पैदा हुई तमाम अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। मैन्यूफैक्चरिंग (विनिर्माण) और सर्विस (सेवा) सेक्टर में दर्ज की गई शानदार मजबूती के दम पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है [cite: मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर की मजबूती से पूरे वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि, भारत सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश बना हुआ है।]।
अंतिम तिमाही में दर्ज की गई शानदार बढ़त
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने बीते वित्त वर्ष में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है:
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चौथी तिमाही का प्रदर्शन: बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 की अंतिम यानी चौथी तिमाही (Q4) में देश की आर्थिकी में 7.8 प्रतिशत की एक मजबूत और बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है [cite: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी, चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही, बीते वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आर्थिकी में हुई 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी]।
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पूरे वित्त वर्ष की विकास दर: इस तेज उछाल के चलते पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी (GDP) विकास दर 7.7 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई है [cite: गत वित्त वर्ष 2025-26 में भी 7.7 प्रतिशत की विकास दर के साथ भारत सबसे तेज गति से विकास करने वाला देश बना हुआ है।, मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर की मजबूती से पूरे वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि]।
वैश्विक संकट भी नहीं रोक पाए रफ्तार
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर के बाजारों में मंदी का माहौल होने और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव के बाद भी भारत का यह प्रदर्शन बेहद सराहनीय है। घरेलू मांग में निरंतर बढ़ोतरी, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकार का ध्यान और औद्योगिक गतिविधियों में आई तेजी ने भारतीय बाजार को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखा है, जिसके कारण भारत वैश्विक मंच पर निवेश के लिए सबसे आकर्षक केंद्र बना हुआ है।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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