पितृ पक्ष में घर से हटाएं ये अशुभ चीजें: वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रसन्न होंगे पितृ
“पितृ पक्ष से पहले घर से निकाल फेंकें ये अशुभ चीजें: वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों को प्रसन्न करने और नकारात्मकता दूर करने के खास उपाय”
नई दिल्ली: सनातन हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण अर्पण करने का अत्यंत पवित्र एवं महत्वपूर्ण काल माना गया है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाली 16 दिनों की यह अवधि पूर्ण रूप से पितरों को समर्पित होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हो चुकी है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पितरों का घर में आगमन होता है। ऐसे में पितरों की अनुकंपा प्राप्त करने, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही घर से कुछ अशुभ और नकारात्मक वस्तुओं को हटा देना बेहद आवश्यक माना गया है।
वास्तु शास्त्र: पितृ पक्ष से पहले घर से तुरंत हटाएं ये वस्तुएं
वास्तु के अनुसार, घर में जमा कबाड़ या टूटी-फूट वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को आकर्षित करती हैं, जिससे पितृ रुष्ट होकर लौट सकते हैं। इसलिए निम्नलिखित चीजों को घर से बाहर कर देना चाहिए:
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टूटी-फूट और बंद घड़ियां:
वास्तु में बंद घड़ी को प्रगति में बाधा और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान घर में बंद या टूटी घड़ी रखने से घर के सदस्यों के जीवन में रुकावटें आती हैं।
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खंडित मूर्तियां और तस्वीरें:
यदि घर के मंदिर या किसी कोने में देवी-देवताओं अथवा पूर्वजों की खंडित (टूटी हुई) तस्वीरें या मूर्तियां रखी हैं, तो उन्हें तुरंत किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। खंडित मूर्तियों की पूजा से वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
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टूटे-फूटे बर्तन और कबाड़:
रसोई या स्टोर रूम में रखे टूटे-फूटे बर्तन, जंग लगा सामान और पुराना कबाड़ वास्तु अनुसार दरिद्रता को न्योता देता है। पितृ पक्ष में साफ-सफाई का विशेष महत्व है, इसलिए घर को कबाड़ मुक्त रखें।
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फटे-पुराने जूते-चप्पल व कपड़े:
घर के मुख्य द्वार या अलमारी में रखे अनुपयोगी, फटे जूते-चप्पल और पुराने कपड़े राहु-शनि के दोष को बढ़ाते हैं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोकते हैं।
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सूखे व मुरझाए पौधे:
यदि घर के आंगन या बालकनी में लगे पौधे सूख चुके हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें। वास्तु के अनुसार सूखे पौधे घर में शोक और नकारात्मकता लाते हैं।
पितृ पक्ष में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि के वास्तु उपाय
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मुख्य द्वार की स्वच्छता: प्रतिदिन सुबह घर के मुख्य द्वार को साफ जल से धोएं और गंगाजल का छिड़काव करें। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती।
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दक्षिण दिशा का ध्यान: वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इस दिशा में पूर्वजों की तस्वीर लगाकर उन पर पुष्प अर्पित करें, परंतु मंदिर के भीतर पितरों की फोटो कभी न रखें।
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दीपक और धूप-दीप: संध्या समय घर के दक्षिण कोण (ईशान या दक्षिण दिशा) में तिल के तेल या गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होकर सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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