पितरों की विदाई पर घर न लाएं ये चीजें, हो सकती है धन हानि

“सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों की विदाई के दिन भूलकर भी घर न लाएं ये 4 चीजें, बढ़ सकती हैं आर्थिक व पारिवारिक परेशानियां”

नई दिल्ली: वैदिक पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष का समापन और पितरों की विदाई का पावन पर्व सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या या पितृ मोक्ष अमावस्या) इस वर्ष 10 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह तिथि सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इस दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि याद न हो या किसी कारणवश पितृ पक्ष के दौरान जिनका श्राद्ध छूट गया हो।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ-साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं की खरीद-बिक्री और उन्हें घर लाना सख्त वर्जित माना गया है, क्योंकि ऐसा करने से पितृ दोष और नकारात्मक ऊर्जा का सामना करना पड़ सकता है।

सर्वपितृ अमावस्या पर भूलकर भी घर न लाएं ये वर्जित चीजें

ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पर निम्नलिखित सामानों की खरीदारी से बचना चाहिए:

  1. लोहे का सामान:

    सर्वपितृ अमावस्या के दिन लोहा या लोहे से बनी वस्तुएं खरीदकर घर नहीं लानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन लोहा घर लाने से धन हानि, आर्थिक तंगी और शनि दोष का प्रभाव बढ़ सकता है।

  2. सरसों का तेल:

    अमावस्या के दिन बाजार से सरसों का तेल खरीदकर घर लाना अशुभ माना जाता है। हालांकि, पितरों के तर्पण और शनिदेव की कृपा हेतु घर में पहले से रखे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ फलदाई होता है।

  3. धारदार और नुकीली वस्तुएं (चाकू, कैंची, कील):

    इस दिन सुई, चाकू, कैंची या कील जैसी धारदार वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए। मान्यता है कि अमावस्या पर नुकीली चीजें घर लाने से पारिवारिक सदस्यों के बीच कटुता और गृह कलह बढ़ती है।

  4. नए वस्त्र और जूते-चप्पल:

    पितृ पक्ष का समय संयम, सादगी और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का होता है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन स्वयं के लिए नए कपड़े या जूते-चप्पल की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से पितृ रुष्ट हो सकते हैं।

पितृ मोक्ष अमावस्या का महत्व

मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर विधि-विधान से तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने से पितृ तृप्त होकर अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देकर देवलोक लौटते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का भी विशेष महात्म्य है।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ अपने पाठकों तक सनातन परंपराओं, पर्व-त्योहारों और वैदिक नियमों की सटीक व प्रामाणिक जानकारी निरंतर पहुंचाती रहेगी।

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