वाराणसी: 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ
वाराणसी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का भव्य शुभारंभ: सीएम योगी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति
वाराणसी/लखनऊ: ‘स्वस्थ प्रदेश, सुपोषित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (National Nutrition Month) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की विशेष और गरिमामयी उपस्थिति रही।
‘स्वस्थ प्रदेश, सुपोषित उत्तर प्रदेश’ का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों पर प्रकाश डाला:
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कुपोषण के खिलाफ जंग: सीएम योगी ने कहा कि एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का आधार उसका स्वस्थ बचपन और सुपोषित मां होती हैं। राज्य सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से प्रदेश के हर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पोषण सेवाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित कर रही है।
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तकनीक और नवाचार का प्रयोग: पोषण ट्रैकर ऐप और डिजिटल निगरानी के जरिए प्रदेश में अति कुपोषित (SAM) और मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष पोषाहार और चिकित्सीय सहायता दी जा रही है।
केंद्र और राज्य के समन्वय से सुदृढ़ होती व्यवस्था
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व सुधारों की सराहना की:
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आंगनवाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण: केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
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जन-आंदोलन का रूप लेता पोषण माह: 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत पूरे सितंबर महीने में राज्यभर में गोद भराई, अन्नप्राशन, पोषण रैलियों और स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन कर इसे एक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
वाराणसी से शुरू हुआ यह राष्ट्रीय अभियान उत्तर प्रदेश के करोड़ों बच्चों, किशोरी बालिकाओं और धात्री माताओं के पोषण और स्वास्थ्य में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
