जल्दबाज़ी में अंतिम संस्कार पर घिरे सीएम भगवंत मान
पंजाब: गुलज़ार सिंह की मौत पर गहराया रहस्य, परिजनों की सहमति बिना जल्दबाज़ी में अंतिम संस्कार पर उठे गंभीर सवाल
चंडीगढ़: पंजाब में नशे (‘चिट्टा’) की समस्या पर राज्य के वित्त मंत्री से तीखे सवाल पूछने वाले पीड़ित पिता गुलज़ार सिंह की दर्दनाक मौत के बाद यह मामला अब केवल प्रशासनिक दमन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक गहरे राजनीतिक व आपराधिक रहस्य में तब्दील हो चुका है। गुलज़ार सिंह द्वारा जहर खाकर जान देने के बाद, उनके शव के आनन-फानन में बिना परिजनों की पूर्ण सहमति के अंतिम संस्कार कराए जाने की खबरों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक प्रताड़ना और जल्दबाज़ी में अंतिम संस्कार पर 3 बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य प्रशासन की नीयत और पारदर्शी कार्रवाई के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं:
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1. सवाल पूछने पर जानलेवा प्रताड़ना क्यों? गुलज़ार सिंह का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने अपने बेटे को नशे के जाल में धकेले जाने पर सवाल किया था। लेकिन सवाल का जवाब देने के बजाय उनके खिलाफ मानसिक दबाव, सार्वजनिक अपमान और धमकियों का दौर शुरू कर दिया गया। ऐसा माहौल क्यों बनाया गया कि एक बेबस पिता को अपनी जान देने पर मजबूर होना पड़ा?
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2. बिना परिजनों की सहमति के इतनी जल्दबाज़ी क्यों? गुलज़ार सिंह की मौत के बाद सबसे बड़ा संशय उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हुआ है। विपक्ष और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने परिजनों की इच्छा व सहमति को नजरअंदाज करते हुए अंतिम संस्कार कराने में अभूतपूर्व जल्दबाज़ी दिखाई।
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3. भगवंत मान सरकार को आखिर किस बात का डर? प्रशासनिक हड़बड़ी को देखकर यह सवाल अब पंजाब के राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है कि क्या सरकार को स्वतंत्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-mortem Analysis) या फोरेंसिक जांच में किसी बड़े सच के सामने आ जाने का डर था? क्या किसी बड़े चेहरे या प्रशासनिक नाकामी को छुपाने के लिए यह कदम उठाया गया?
सवालों से भाग रही है सरकार: विपक्ष और नागरिक संगठनों का हमला
विपक्षी दलों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि सरकार का काम नशा रोकना और नागरिकों को सुरक्षा देना है, सवाल उठाने वालों को खामोश करना नहीं:
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निष्पक्ष जांच में अड़चन: परिजनों की उपस्थिति और सहमति के बिना किए गए इस अंतिम संस्कार ने पूरे मामले की कानूनी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग: जनता और विपक्षी नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं कि अपने पद का दुरुपयोग कर एक आम नागरिक को आत्महत्या के लिए उकसाने और दबाव बनाने के आरोपी मंत्रियों व अधिकारियों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब पुलिस को अब जनता के सामने आकर यह साफ करना होगा कि आखिर गुलज़ार सिंह की मौत के बाद किस दबाव में और किसके आदेश पर यह प्रक्रिया पूरी की गई। सच दबाने की यह कोशिश पंजाब की कानून-व्यवस्था पर हमेशा एक गहरा धब्बा बनी रहेगी।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

