PM मोदी: प्रकृति सम्मान राष्ट्र का आधार
PM मोदी का आह्वान: प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान हमारे अस्तित्व का मूल आधार; संस्कृत सुभाषितम् साझा कर दिया राष्ट्र कल्याण का संदेश
विशेष राष्ट्रीय एवं प्रशासनिक ब्यूरो: नई दिल्ली
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रकृति, पर्यावरण और संपूर्ण सृष्टि के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखना हमारे जीवन एवं अस्तित्व का मूल आधार है। उन्होंने देशवासियों से एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में पूरी निष्ठा, निस्वार्थ सेवा और कृतज्ञता की भावना के साथ अपना योगदान देने का आह्वान किया है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर प्रकृति संरक्षण और सृष्टि कल्याण को समर्पित वैदिक सुभाषितम् साझा करते हुए अपना संदेश दिया।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया वैदिक सुभाषितम्
“शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु।
शं न ओषधीर्वनिनो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः॥”
सुभाषितम् का हिंदी अर्थ:
सृष्टि के आरंभ से ही पूजनीय द्युलोक (आकाश) और पृथ्वी हमारे लिए सदा श्रद्धेय और कल्याणकारी रहे हैं। ईश्वर करे कि पृथ्वी और सूर्य के बीच का मध्यवर्ती भाग (अंतरिक्ष) हमारे जीवन को लाभप्रद और ज्ञानवर्धक बनाए। सभी औषधीय जड़ी-बूटियां और वनस्पति हमें स्वास्थ्य, पोषण एवं सुख प्रदान करें। समस्त लोकों के सर्वव्यापी और विजयी स्वामी (ईश्वर) हमें सदा कल्याण, शांति तथा समृद्धि प्रदान करें।
कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ राष्ट्र निर्माण का संदेश
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा:
“प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।”
प्रधानमंत्री के इस संदेश का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना तथा देशवासियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हुए राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है।
राष्ट्रीय एवं प्रशासनिक ब्यूरो: नई दिल्ली
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

