जल अनुसंधान राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन

दिल्ली: जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जल अनुसंधान पर राष्ट्रीय कार्यशाला का किया उद्घाटन; ‘मिशन माहा’ का हुआ शुभारंभ

(नई दिल्ली): देश में जल संकट के स्थायी समाधान और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर मंगलवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से ‘जल अनुसंधान और विकास’ पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य उद्घाटन किया।

इस बेहद महत्वपूर्ण अवसर पर जल क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।

2047 तक विकसित भारत के सपने को तकनीक से करेंगे साकार: सी.आर. पाटिल

कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि इस राष्ट्रीय कार्यशाला में जल संकट के समाधानों और जल संवर्धन पर देश भर के विशेषज्ञ व्यापक विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा:

“अभूतपूर्व नवाचारों (Innovations) और नई प्रौद्योगिकियों का एकीकरण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने में एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक भूमिका निभाएगा।”

श्री पाटिल ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए और व्यावहारिक विचार लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से एक मंच पर आए सभी हितधारकों (Stakeholders) के सामूहिक संकल्प की जमकर सराहना की।

जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच बड़ा समझौता

इस कार्यक्रम के दौरान देश के जल संसाधनों के सटीक आकलन, प्रभावी निगरानी और प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय और इसरो (ISRO) ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थाओं के बीच उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों (Satellite-based applications) और उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को मजबूत करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

  • चिन्हित किए गए क्षेत्र: इस द्विपक्षीय सहयोग के तहत जल प्रबंधन से जुड़े 24 प्राथमिकता वाले महत्वपूर्ण अध्ययनों और सहयोग के क्षेत्रों को पहले ही चिन्हित किया जा चुका है।

  • बढ़ेगी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्तमान में यह 9 अरब डॉलर की है, जिसके निकट भविष्य में 10 गुना वृद्धि करने का अनुमान है। उन्होंने इस समझौते को पीएम मोदी के ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ (Whole of Government Approach) का एक आदर्श प्रतीक बताया।

अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए ‘मिशन माहा’ का शुभारंभ

देश में जल क्षेत्र से जुड़े उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में तकनीकी उन्नति और विकास को रफ्तार देने के लिए दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने संयुक्त रूप से ‘मिशन माहा’ (Mission MAHA) का शुभारंभ किया।

यह महत्वाकांक्षी मिशन जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान (Anusandhan National Research Foundation) की एक अनूठी संयुक्त पहल है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता (Climate Resilience) और जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) जैसे शीर्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में वैश्विक स्तर के अत्याधुनिक अनुसंधान और रिसर्च को बढ़ावा देना है।


रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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