बरेली में गन्ना भुगतान के लिए किसान परेशान
बरेली: मात्र 21,000 रुपये के गन्ना भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा बीमार किसान; अर्धनग्न होकर दे चुका है धरना, समाज सेविका आईं समर्थन में
रिपोर्ट: विशेष ब्यूरो (बरेली)
(बरेली): उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की नवाबगंज तहसील से एक बेहद भावुक और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ ओसवाल चीनी मिल से जुड़े एक पीड़ित गन्ना किसान को अपनी एक मात्र पर्ची के 21,000 रुपये के बकाए भुगतान के लिए जिलाधिकारी (DM) दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। गंभीर बीमारी से जूझ रहा यह किसान आर्थिक तंगी के कारण अपना इलाज तक नहीं करा पा रहा है। आरोप है कि स्थानीय राजनीति और गन्ना समिति के अध्यक्ष के अड़ियल रवैये के कारण इस गरीब किसान का भुगतान रोका गया है, जिसके विरोध में पीड़ित तहसील में अर्धनग्न (आधे कपड़ों) में धरना भी दे चुका है।
इस लड़ाई में अब पीड़ित किसान के समर्थन में ‘पैनी नजर सामाजिक संस्था’ की अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीता गंगवार आगे आई हैं और उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल भुगतान की मांग की है।
बीमार है किसान, इलाज के लिए नहीं हैं पैसे
मिली जानकारी के अनुसार, नवाबगंज क्षेत्र के पीड़ित किसान खेमकरण लाल लंबे समय से अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए नेताओं, गन्ना समिति और प्रशासनिक दफ्तरों की खाक छान रहे हैं। किसान खेमकरण इस समय काफी बीमार हैं और आर्थिक तंगी के कारण दाने-दाने को मोहताज हैं।
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अध्यक्ष पर आरोप: पीड़ित का आरोप है कि उनका जायज पैसा गन्ना समिति के अध्यक्ष ने दुर्भावनाग्रस्त होकर रोक रखा है।
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अनोखा प्रदर्शन: स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर बेबस किसान ने नवाबगंज तहसील परिसर में अर्धनग्न हालत में बैठकर धरना भी दिया था, ताकि सोए हुए प्रशासन को जगाया जा सके। लेकिन स्थानीय राजनीति के चलते अब तक उनके पैसे रिलीज नहीं किए गए।
जनप्रतिनिधि कर रहे पावर का गलत इस्तेमाल: एडवोकेट सुनीता गंगवार
पीड़ित किसान की मदद के लिए आगे आईं ‘पैनी नजर सामाजिक संस्था’ की अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता गंगवार ने इस पूरे प्रकरण पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर राजनेताओं और अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
“जनता चुनाव के समय अपनी पूरी ताकत (पॉवर) एक जनप्रतिनिधि को सौंप देती है, लेकिन जीतने के बाद वही जनप्रतिनिधि इस ताकत का इस्तेमाल जनता के ही खिलाफ करने लगते हैं। यह बेहद शर्मनाक है और राजनीतिक स्तर को बहुत नीचे गिराता है। ऐसी असंवेदनशील राजनीति नहीं होनी चाहिए।”
सुनीता गंगवार ने आगे बताया कि नवाबगंज क्षेत्र में लगभग 24,000 ऐसे किसान हैं, जिनका ओसवाल मिल पर बकाया भुगतान बाकी है। पीड़ित खेमकरण लाल भी उन्हीं हजारों किसानों में से एक हैं, लेकिन उनकी गंभीर बीमारी और तत्काल आवश्यकता को देखते हुए उनका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर तुरंत होना चाहिए। इसकी पूरी व्यवस्था और फंड गन्ना समिति के पास उपलब्ध होता है।
जिलाधिकारी ने दिया आश्वासन, मुख्यमंत्री से भी लगाई गुहार
मामले को लेकर जब सामाजिक संस्था और पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी से मुलाकात की, तो डीएम ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। सुनीता गंगवार ने बताया कि जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि किसान का भुगतान शीघ्र से शीघ्र कराया जाएगा, क्योंकि यह उसका अपना अधिकार है।
वहीं, थक-हार चुके पीड़ित किसान खेमकरण लाल ने अब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इस मामले में दखल देने की अपील की है, ताकि उन्हें इलाज के लिए अपना पैसा मिल सके और वे सम्मान से जी सकें।
बरेली से अमरजीत की रिपोर्ट
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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