नाम: घनश्याम वर्मा उर्फ करन उर्फ बाबा.
यूपी एसटीएफ की बड़ी कामयाबी: गुजरात में मर्डर व डकैती का दोषी और 15 साल से फरार कैदी अयोध्या से गिरफ्तार
लखनऊ/अयोध्या: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसटीएफ ने गुजरात की बड़ोदरा जेल से इलाज के दौरान पुलिस को चकमा देकर पिछले 15 वर्षों से फरार चल रहे शातिर अपराधी और आजीवन कारावास के सजायाफ्ता कैदी घनश्याम वर्मा को अयोध्या से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर गुजरात में सुरक्षा गार्ड की हत्या कर डकैती डालने का संगीन आरोप सिद्ध हो चुका है।
कैलाश टायर एजेंसी पर कर रहा था काम
एसटीएफ मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी शनिवार (04 जुलाई 2026) को दोपहर करीब 1:10 बजे अयोध्या के थाना कैंट अंतर्गत सआदतगंज बाईपास पर स्थित ‘कैलाश टायर (सीएट) एजेंसी’ से की गई, जहाँ वह अपनी पहचान छिपाकर गाड़ियों की व्हील बैलेंसिंग का काम कर रहा था।
गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण:
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नाम: घनश्याम वर्मा उर्फ करन उर्फ बाबा
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निवासी: ग्राम खमरिया हरिवंश, थाना कोतवाली देहात, जनपद गोंडा (उत्तर प्रदेश)
क्या था पूरा मामला और कैसे हुआ था फरार?
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2008 का हत्याकांड व डकैती: 16 फरवरी 2008 को गुजरात के भरूच जिले में स्थित ‘गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कंपनी’ में सुरक्षा गार्ड की बेरहमी से हत्या कर डकैती की गई थी, जिसके संबंध में थाना भरूच ए-डिवीजन में धारा 396 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
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आजीवन कारावास की सजा: इस मामले में माननीय न्यायालय ने 1 सितंबर 2009 को घनश्याम वर्मा को दोषी पाते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। उसे पहले जूनागढ़ जेल और बाद में बड़ोदरा जेल में शिफ्ट किया गया था।
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अस्पताल से फरारी (2011): बड़ोदरा जेल में रहने के दौरान 2 जनवरी 2011 को उसे इलाज के लिए एसएसजी हॉस्पिटल बड़ौदा ले जाया गया था, जहाँ से वह सुरक्षा में तैनात सिपाही को धक्का देकर फरार हो गया था। इसके बाद उसके खिलाफ थाना रावपुरा (बड़ौदा) और वलसाड जिले के वापी टाउनशिप थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हुए थे।
यूपी एसटीएफ और गुजरात पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन
लगातार फरार चल रहे इस इनामी अपराधी को पकड़ने के लिए गुजरात पुलिस ने यूपी एसटीएफ से सहयोग मांगा था। डिप्टी एसपी विमल कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एसटीएफ लखनऊ के निरीक्षक ज्ञानेन्द्र कुमार राय, निरीक्षक दीपक सिंह, उप-निरीक्षक उमाशंकर, मुख्य आरक्षी अंकित पांडेय और गुजरात के वलसाड जिले के सब-इंस्पेक्टर संदीप आर. सुसलादे की संयुक्त टीम ने खुफिया तंत्र की मदद से जाल बिछाकर आरोपी को दबोच लिया।
पूछताछ में उगला फरारी का सच
पूछताछ में घनश्याम ने बताया कि वह बचपन में ही पिता के साथ लुधियाना चला गया था और गाड़ियों का काम सीखा था। जेल से भागने के बाद वह अमृतसर चला गया और वहां मोटर मैकेनिक का काम करने लगा। कोरोना काल में वह छिपकर अपने गांव गोंडा आ गया और पिछले 2-3 साल से अयोध्या में टायर एजेंसी पर काम कर रहा था।
वलसाड पुलिस के उप-निरीक्षक संदीप आर. सुसलादे द्वारा अभियुक्त को कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात ले जाने की अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
संपादित: क्राइम डेस्क
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
(एडिटर (Allrights Magazine)

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