सड़क पर नमाज: ओवैसी का बड़ा बयान
‘डबल स्टैंडर्ड क्यों?’— असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा हमला; बोले— अगर सड़क पर नमाज गलत, तो हर धार्मिक जश्न पर लगे रोक
नई दिल्ली/मुंबई: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने देश में धार्मिक गतिविधियों को लेकर ‘दोहरे मापदंड’ (Double Standards) अपनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत माना जाता है, तो कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए।
📜 संविधान के अनुच्छेद 25 का दिया हवाला (Key Highlights):
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सभी पर लागू हों पाबंदियां: ओवैसी ने मांग की कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाती है, तो सभी धर्मों की ऐसी ही धार्मिक गतिविधियों और सड़क पर होने वाले आयोजनों पर भी समान रूप से पाबंदियां लागू होनी चाहिए।
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संविधान का जिक्र: अपने बयान को सही ठहराते हुए AIMIM प्रमुख ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि यह अनुच्छेद देश के हर नागरिक को अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने, उसे मानने और उसका प्रचार करने के अधिकार की गारंटी देता है।
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भेदभाव का आरोप: उन्होंने सवाल उठाया कि जब बात एक समुदाय विशेष की आती है तो नियम बदल क्यों जाते हैं? प्रशासन को सभी धार्मिक त्योहारों और जुलूसों को लेकर एक जैसा रुख अपनाना चाहिए।
बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज
ओवैसी के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आलोचकों और समर्थकों के बीच इस बात को लेकर खींचतान जारी है कि सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। चुनावी माहौल के बीच ओवैसी का यह स्टैंड आने वाले दिनों में और भी ज्यादा सुर्खियां बटोर सकता है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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