टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: शूटरों को विदेश में नौकरी और बड़ी रकम का था लालच, ₹50 हजार मिले थे एडवांस
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: विदेश में नौकरी और मोटी रकम का था वादा, शूटरों को मिले थे ₹50,000 एडवांस”
विशेष आपराधिक एवं अनुसंधान रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
नई दिल्ली / मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले की कोशिश के मामले में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस साजिश की नई और चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं। पुलिस जांच के अनुसार, घटना को अंजाम देने वाले शूटरों को सिर्फ पैसों का ही नहीं, बल्कि वारदात के बाद विदेश में नौकरी दिलाने और वहां सुरक्षित सेटल कराने का बड़ा लालच दिया गया था। इस पूरी साजिश के तार जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं।
1. ₹50,000 एडवांस और किश्तों में पेमेंट का खेल
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एडवांस का भुगतान: जांचकर्ताओं से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए तीनों आरोपियों—ऋतिक उर्फ रोशन (22), रेहान (18) और फूल सिंह (18)—को एडवांस के तौर पर कुल ₹50,000 दिए गए थे।
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बड़ी रकम और विदेश भेजने का झांसा: शूटरों से यह वादा किया गया था कि अगर वे हमले को सफलता से अंजाम दे देते हैं, तो उन्हें एक बड़ी अतिरिक्त रकम सौंपी जाएगी और तुरंत विदेश भेजकर वहां नौकरी तथा नया ठिकाना मुहैया कराया जाएगा।
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वित्तीय सुराग छुपाने की पैंतरेबाजी: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिंडिकेट के आका पैसों के डिजिटल लेन-देन को एजेंसियों की नजरों से छुपाने के लिए आरोपियों को छोटी-छोटी किश्तों में रकम ट्रांसफर कर रहे थे।
2. ‘अज्ञात हैंडलर’ के जरिए तैयार किए गए शूटर
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कमांड नेटवर्क: शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि विदेश या किसी सुरक्षित ठिकाने से ऑपरेट कर रहे एक ‘अज्ञात हैंडलर’ ने सोशल मीडिया/एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए इनमें से एक आरोपी से संपर्क साधा था।
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मासूमियत और मजबूरी का फायदा: हैंडलर ने युवाओं को विदेशों के सुनहरे भविष्य और झटपट अमीर बनने का सपना दिखाकर इस जघन्य वारदात के लिए मोहरा बनाया।
3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: युवाओं का इस्तेमाल और सुरक्षा की चुनौती
गैंगस्टर सिंडिकेट्स द्वारा भारतीय युवाओं को पैसों और विदेश भेजने के झूठे वादों में फंसाकर सुपारी किलिंग व फायरिंग जैसी वारदातों में धकेलना बेहद चिंताजनक है। मुंबई पुलिस, यूपी एसटीएफ और केंद्रीय एजेंसियां अब इस ‘अज्ञात हैंडलर’ के डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करने और मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुँचने में जुटी हुई हैं।
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