बरेली कोर्ट में वकीलों का अनिश्चितकालीन धरना
बरेली जनपद न्यायालय परिसर विवाद: अनैतिक कार्रवाई के खिलाफ अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना
बरेली – उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद न्यायालय परिसर में नगर निगम प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा है। 13 अगस्त 2026 को बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के की गई इस कार्रवाई के विरोध में पीड़ित अधिवक्ताओं ने 16 अगस्त 2026 से न्यायालय परिसर में ‘अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन’ शुरू कर दिया है।
वकीलों का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान, उनके पेशेवर अधिकारों और आम जनता को मिलने वाले न्याय कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए है।
विवाद का पूरा घटनाक्रम
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13 अगस्त 2026 की कार्रवाई: नगर निगम प्रशासन की एक टीम ने जनपद न्यायालय परिसर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।
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बिना नोटिस और क्षति का आरोप: अधिवक्ताओं का आरोप है कि नगर निगम ने बिना किसी पूर्व नोटिस और बार एसोसिएशन को सूचित किए बिना यह कदम उठाया। इस दौरान कई वकीलों के चैंबरों को नुकसान पहुँचाया गया और वकालत से जुड़े आवश्यक दस्तावेज़, केस फाइलें तथा सामान ज़ब्त कर लिया गया।
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न्यायिक कार्य प्रभावित: इस कार्रवाई से फरियादियों की कई फाइलें अटक गई हैं और वकीलों के रोज़गार व पेशेवर काम पर गंभीर असर पड़ा है।
पीड़ित अधिवक्ताओं की 4 प्रमुख माँगें
धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन के समक्ष अपनी माँगें रखी हैं:
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अस्थाई सीट/चैंबर आवंटन: ऑफिसर्स हॉस्टल से लेकर सुधीर जैन चौक तक नाले के ऊपर पूर्व की भांति सीट या चैंबर लगाने की विधिवत अनुमति दी जाए।
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₹2,00,000 की आर्थिक क्षतिपूर्ति: कार्रवाई के दौरान प्रभावित हुए प्रत्येक पीड़ित अधिवक्ता को ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की मुआवजा/क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
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पत्रावलियों एवं सामान की तत्काल वापसी: वकालत से संबंधित ज़ब्त की गई सभी महत्वपूर्ण फाइलें, दस्तावेज़ और सामान तत्काल सम्मानपूर्वक वापस किए जाएं।
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भविष्य के लिए लिखित आश्वासन: नगर निगम लिखित रूप में आश्वासन दे कि भविष्य में अधिवक्ताओं या बार एसोसिएशन को पूर्व लिखित सूचना दिए बिना ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
“याचना नहीं अब रण होगा” — अधिवक्ताओं का कड़ा रुख
इस संयुक्त ज्ञापन और विज्ञप्ति में एडवोकेट धर्मवीर सिंह तोमर, एड० दीपक कुमार, एड० सौमेंद्र सिंह यादव, एड० इमरान राजा, एड० आबिद हुसैन, एड० सज्जाद अली, एड० जितेंद्र कश्यप, एड० विकास कुमार, एड० सुखवीर सिंह, एड० सुशील सिंह समेत कई अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर शामिल हैं।
अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा है— “न्याय के मंदिर में काम करने वाले वकीलों के साथ बिना वैधानिक प्रक्रिया के की गई कार्रवाई स्वीकार्य नहीं होगी। जब तक हमारी जायज़ मांगों पर ठोस और लिखित समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा!”
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

