लखनऊ संदीप सिंह हत्याकांड का खुलासा
लड़खड़ाया जमीनी रंजिश का ताना-बाना: लखनऊ के प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड का एसटीएफ ने किया सनसनीखेज खुलासा; मुख्य साजिशकर्ता सहित 2 गिरफ्तार
रिपोर्ट: विशेष ब्यूरो (लखनऊ):
उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (UP STF) ने लखनऊ के थाना पीजीआई क्षेत्र में हुई प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह की सनसनीखेज हत्या की घटना का सफल अनावरण कर दिया है। एसटीएफ और स्थानीय पीजीआई थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए हत्या की पूरी साजिश रचने वाले मुख्य मास्टरमाइंड (प्रापर्टी डीलर) और उसके वफादार ड्राइवर को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
यह पूरी हत्या समदा स्थित एक कीमती जमीन के विवाद, लगातार हो रही मुकदमेबाजी और शिकायतों से तंग आकर ₹5 लाख की सुपारी देकर शूटरों से कराई गई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल की असली नंबर प्लेट भी बरामद कर ली है।
प्रेस नोट (संख्या: 161) के अनुसार गिरफ्तारी का विवरण
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गिरफ्तार अभियुक्तगण:
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दिनेश कुमार यादव (पुत्र स्वर्गीय राम चन्द्र यादव), निवासी: समुदा (थाना आलापुर, अम्बेडकरनगर); हाल पता: ग्राम समदा, थाना काकोरी, लखनऊ (मुख्य साजिशकर्ता)।
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मुकर्रबीन उर्फ मुबीन (पुत्र नईमुद्दीन), निवासी: आशोपुर, थाना अलीगंज, जनपद अम्बेडकरनगर।
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गिरफ्तारी का स्थान व दिनांक: डलौना अंडरपास के नीचे, सर्विस लेन, लखनऊ; दिनांक 31 मई, 2026।
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संबद्ध मुकदमा: मु०अ०सं०-291/2026, धारा 103 (1) बीएनएस (BNS), थाना पी०जी०आई०, कमिश्नरेट लखनऊ।
बरामदगी का विवरण (Seizure Memo)
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पंजीकरण नंबर प्लेट: UP32GR2185 (वारदात में प्रयुक्त अपाचे बाइक की असली नंबर प्लेट)।
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नगद राशि: 3300 रुपये।
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मोबाइल फोन: 02 अदद।
डलौना अंडरपास के पास संयुक्त टीम ने दबोचा
बीते 27 मई, 2026 को लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। राजधानी में दिनदहाड़े हुई इस वारदात से हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (UP STF) श्री दीपक कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में एसटीएफ की कई टीमों को खुफिया तंत्र सक्रिय करने के निर्देश दिए गए थे।
“एसटीएफ के उपनिरीक्षक तेज बहादुर सिंह और हरीश सिंह चौहान की टीम वांछितों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान 31 मई को मुखबिर से सूचना मिली कि वारदात में शामिल एक मुख्य आरोपी डलौना अंडरपास के नीचे सर्विस लेन पर आने वाला है। एसटीएफ ने फौरन स्थानीय पीजीआई थाने के निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार सिंह और उनकी टीम के साथ संयुक्त जाल बिछाकर मुकर्रबीन उर्फ मुबीन को दबोच लिया। मुबीन से हुई कड़ाई से पूछताछ के आधार पर मुख्य साजिशकर्ता दिनेश कुमार यादव को एसटीएफ मुख्यालय तलब किया गया और पुख्ता साक्ष्य मिलने पर उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।”
पूछताछ में कबूला: ₹5 लाख की दी थी सुपारी, रची थी ‘एलिबाई’ की साजिश
पकड़े गए ड्राइवर मुकर्रबीन उर्फ मुबीन ने हत्या के पीछे की पूरी खौफनाक पटकथा का खुलासा किया:
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जमीन का विवाद और मुकदमेबाजी: मुबीन वर्ष 2016 से दिनेश कुमार यादव की गाड़ी चलाता है। दिनेश यादव बड़े पैमाने पर प्रापर्टी का काम करता है। दिनेश का समदा स्थित एक जमीन को लेकर संदीप सिंह से पुराना और गहरा विवाद चल रहा था। संदीप सिंह इस मामले को लेकर लगातार दिनेश के खिलाफ शिकायतें और मुकदमेबाजी कर रहा था, जिससे दिनेश का धंधा प्रभावित हो रहा था और वह मानसिक रूप से परेशान था।
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शूटरों का इंतजाम और रेकी: आजिज आकर दिनेश ने संदीप सिंह को रास्ते से हटाने का फैसला किया। दिनेश के कहने पर ड्राइवर मुबीन ने एक बिचौलिए से बात कर ₹5 लाख में हत्या का सौदा तय किया। उस व्यक्ति ने 2 पेशेवर शूटर बुलाए। शूटरों के लखनऊ में ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था मुबीन ने की और उन्हें संदीप सिंह के आने-जाने के रास्तों (रूट) की रेकी करवाई।
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सेकंड हैंड अपाचे और फर्जी नंबर प्लेट: वारदात को अंजाम देने के लिए दिनेश यादव ने मुबीन को पैसे दिए, जिससे उसने अमीनाबाद बाजार से एक पुरानी (सेकंड हैंड) अपाचे मोटरसाइकिल खरीदी। इस बाइक की असली नंबर प्लेट (UP32GR2185) हटाकर इस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
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त्योहार का बहाना बनाकर शहर से हुए बाहर: दिनेश यादव बेहद शातिर दिमाग था। उसने योजना बनाई थी कि जिस दिन हत्या हो, उस दिन वे दोनों लखनऊ में न रहें ताकि पुलिस उन पर शक न करे (एलिबाई मिल सके)। तय योजना के अनुसार, 27 मई को वारदात वाले दिन मुबीन ‘बकरीद का त्योहार’ मनाने का बहाना बनाकर अपने गांव चला गया और दिनेश यादव भी लखनऊ से बाहर निकल गया। दोपहर में शूटरों ने फोन कर दोनों को तसल्ली दी कि संदीप सिंह का काम तमाम हो चुका है।
साजिशकर्ता दिनेश यादव का लंबा आपराधिक इतिहास
एसटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार किया गया मास्टरमाइंड दिनेश कुमार यादव साधारण प्रापर्टी डीलर नहीं है, बल्कि उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी और जमीनों पर अवैध कब्जे के करीब 9 गंभीर मामले पहले से ही लखनऊ और अम्बेडकरनगर में दर्ज हैं:
| क्र०सं० | मुकदमा अपराध संख्या | संबद्ध धाराएं (IPC/BNS) | थाना | जनपद |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 178/2015 | 171एफ, 131 भादवि | आलापुर |
अम्बेडकरनगर |
| 2 | 304/2015 | 386, 504, 467, 468, 406, 420 भादवि | कृष्णानगर |
लखनऊ |
| 3 | 342/2018 | 406, 420, 506 भादवि | आशियाना |
लखनऊ |
| 4 | 507/2018 | 447 भादवि | काकोरी |
लखनऊ |
| 5 | 881/2020 | 406, 420 भादवि | गोमतीनगर |
लखनऊ |
| 6 | 60/2022 | 406, 420, 504, 506 भादवि | वजीरगंज |
लखनऊ |
| 7 | 283/2022 | 406, 420, 467, 468, 471, 504, 506 भादवि | वजीरगंज |
लखनऊ |
| 8 | 94/2023 | 504, 506 भादवि | काकोरी |
लखनऊ |
| 9 | 489/2025 | 324(4), 351(3), 329(3), 61 (2) बीएनएस | काकोरी |
लखनऊ |
दोनों अभियुक्तों को हत्या की मूल धारा 103 (1) बीएनएस के तहत थाना पी०जी०आई० (कमिशनरेट लखनऊ) में दाखिल करा दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल फरार शूटरों और बिचौलिए की तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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