लखनऊ: सामाजिक न्याय पर महामंथन

एससी, एसटी और ओबीसी समाज की एकता से ही सामाजिक न्याय का सपना होगा साकार: एडवोकेट वसी अहमद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्रीय अंबेडकर विचार मंच के कार्यालय में ‘एससी, एसटी एवं ओबीसी समाज की एकता और सामाजिक न्याय’ विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जय भीम फोरम के तत्वावधान में आयोजित इस वैचारिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक चिंतकों ने हिस्सा लेकर वंचित समाज की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर गहरा मंथन किया।

इस महत्वपूर्ण गोष्ठी की अध्यक्षता ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट वसी अहमद ने की, जबकि मंच का सफल संचालन प्रसादी पासवान द्वारा किया गया।

एससी, एसटी और ओबीसी की एकता ही सामाजिक बदलाव का आधार: एडवोकेट वसी अहमद

अपने अध्यक्षीय संबोधन में एडवोकेट वसी अहमद ने वर्तमान दौर में बहुजन समाज की एकजुटता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा:

“आज समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) एवं समाज के तमाम वंचित व अल्पसंख्यक वर्गों को एक साझा मंच पर लाने की है। इन वर्गों के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग की भावना विकसित किए बिना देश में वास्तविक सामाजिक न्याय और समानता का लक्ष्य कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे जोड़ा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का समतामूलक समाज का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के सभी कमजोर वर्ग अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, उच्च शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

संगठन और जागरूकता से ही मिलेगा अधिकार: भुवन नाथ पासवान

राष्ट्रीय अंबेडकर विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भुवन नाथ पासवान ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समाज को शिक्षा, मजबूत संगठन और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक एकता ही किसी भी बड़े और सकारात्मक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।

युवाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक: प्रसादी पासवान

कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए प्रसादी पासवान ने युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज की नई और युवा पीढ़ी को वैचारिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन से जोड़ना बेहद जरूरी है, क्योंकि युवा ही इस वैचारिक कारवां को आगे ले जा सकते हैं।

प्रबुद्ध वक्ताओं ने रखे अपने विचार

विचार गोष्ठी में देश भर से आए अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी:

  • किशोरी लाल ने सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने के महत्व पर बल दिया।

  • एडवोकेट शाविक अली खान ने भारतीय संविधान में दिए गए समानता एवं न्याय के अधिकारों का उल्लेख करते हुए उनकी रक्षा के लिए सदैव संगठित रहने का आह्वान किया।

  • गयास शेरवानी ने कहा कि जब तक समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों की आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक वास्तविक सामाजिक परिवर्तन अधूरा है।

देशभर के सामाजिक संगठन और पदाधिकारी जुटे

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जय भीम फोरम के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा। फोरम के संयोजक छोटू भाई (विश्वा) गुजरात से, वाइस चेयरमैन एडवोकेट वसी अहमद (बरेली) तथा प्रेसिडेंट प्रसादी पासवान (बड़ौदा) के रूप में सक्रिय भूमिका में रहे। वहीं, संगठन के महासचिव डॉ. राजेश्वर गौतम (नई दिल्ली) ने देश के कोने-कोने से आए सभी प्रतिभागियों और विचारकों का आभार व्यक्त किया।

गोष्ठी के समापन पर उपस्थित सभी प्रबुद्ध नागरिकों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के क्रांतिकारी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा वंचित समाजों के बीच आपसी एकता और विश्वास को और मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी नहीं है। उनकी 125वीं जन्म-जयंती पर देश उन्हें शत-शत नमन करता है।

रिपोर्ट: अमरजीत सिंह, बरेली

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

डॉ. मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती!

https://wp.me/p9lpiM-OB1मजदूरों के लिए नई मुआवज़ा नीति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: