लखनऊ अग्निकांड: 300 परिवार बेघर
लखनऊ अग्निकांड: 300 से अधिक परिवार बेघर, आग में जिंदा जलीं दो मासूम बहनें
(ब्यूरो रिपोर्ट: लखनऊ)
राजधानी लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में बुधवार शाम को प्रकृति और नियति का सबसे क्रूर चेहरा सामने आया। रिंग रोड स्थित झुग्गियों में लगी भीषण आग ने न केवल 300 से अधिक परिवारों की छत छीन ली, बल्कि एक पिता की गोद भी हमेशा के लिए सूनी कर दी। इस हादसे में बाराबंकी के एक परिवार की दो मासूम बेटियां जिंदा जल गईं।
सिलेंडर ब्लास्ट ने आग को बनाया भयावह
बुधवार शाम को लगी इस आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप ले लिया। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
-
सिलेंडर धमाके: आग के दौरान एक के बाद एक लगभग 30 गैस सिलेंडर फटने से धमाकों की आवाज दूर-दराज तक सुनी गई।
-
धुएं का गुबार: आसमान में 10 किलोमीटर दूर तक काले धुएं का गुबार देखा गया।
-
राहत कार्य: फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियों ने करीब 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
पिता ने राख से निकाले बेटियों के शव
यह हादसा बाराबंकी निवासी सतीश के परिवार के लिए कभी न भूलने वाला जख्म बन गया। सतीश की दो मासूम बेटियां— श्रुति (2 वर्ष) और आयुषी (2 माह)—झोपड़ी में सो रही थीं। जब आग फैली, तो जान बचाने की भागदौड़ में बच्चियां अंदर ही रह गईं। गुरुवार सुबह जब सतीश ने जली हुई राख को अपने हाथों से खोदा, तो उसे अपनी दोनों बेटियों के अधजले शव मिले। इस मंजर को देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। सतीश ने रोते हुए कहा, “मेरी गृहस्थी के साथ मेरा संसार ही उजड़ गया।”
पोस्टमार्टम के बाद दी गई अंतिम विदाई
पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शवों का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों बच्चियों के शवों को दफनाया गया। गमगीन सतीश इसके बाद दोबारा उस जगह की ओर नहीं मुड़ा जहाँ उसकी झुग्गी थी और अपने परिवार के साथ पैतृक गांव बाराबंकी लौट गया।
खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर परिवार
अग्निकांड के बाद की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है:
-
बेघर परिवार: 300 से ज्यादा परिवारों के पास अब न रहने को घर है और न पहनने को कपड़े।
-
रैन बसेरे: प्रशासन ने कुछ लोगों को रैन बसेरों में शिफ्ट किया है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग पार्कों और सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं।
-
प्रशासनिक कार्रवाई: डीसीपी दीक्षा शर्मा और एसीपी ए. विक्रम सिंह के अनुसार, राहत और बचाव कार्य जारी है। बेघर परिवारों की सूची तैयार की जा रही है, हालांकि मुआवजे पर अभी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

