लक्ष्मी नगर: तंग गलियों में ‘अवैध ओयो’ पर सवाल
दिल्ली: लक्ष्मी नगर की तंग गलियों में ‘अवैध ओयो’ का मकड़जाल, MCD और पुलिस की कथित मिलीभगत पर उठे गंभीर सवाल
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल लक्ष्मी नगर की तंग गलियां इन दिनों हादसों और भ्रष्टाचार का नया केंद्र बन चुकी हैं। क्षेत्र में बिना किसी वैध लाइसेंस, फायर सेफ्टी (Fire NOC) और अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान के सैकड़ों अवैध ओयो (OYO) और गेस्ट हाउस धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए (RWA) का आरोप है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और स्थानीय पुलिस महकमे के निचले स्तर के अधिकारियों की कथित साठगांठ व भ्रष्टाचार (Corruption) के चलते इस अवैध धंधे पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है।

‘हादसे के बाद एक्टिव, फिर सांठगांठ’: भ्रष्टाचार का फिक्स पैटर्न
लक्ष्मी नगर की तंग गलियों में पनप रहे इस अवैध कारोबार के पीछे एक बेहद खतरनाक प्रशासनिक पैटर्न सामने आ रहा है:
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पूर्व सूचना देकर अलर्ट करने का खेल: नागरिकों का सीधा आरोप है कि जब भी दिल्ली में कोई बड़ा हादसा होता है या वरिष्ठ अधिकारियों का दबाव बनता है, तो निचले स्तर के कर्मचारी कार्रवाई से पहले ही इन अवैध होटल व ओयो संचालकों को अलर्ट कर देते हैं।
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अस्थाई शटडाउन का नाटक: अलर्ट मिलते ही संचालक कुछ दिनों के लिए अपने बोर्ड हटाकर होटलों को बंद कर देते हैं, जिससे कागजों पर कार्रवाई पूरी दिखाई जा सके और वे कानूनी शिकंजे से बच जाएं।
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मामला शांत होते ही फिर शुरू: जैसे ही मीडिया और उच्च अधिकारियों का ध्यान इस मुद्दे से हटता है, ‘हफ्ता और रिश्वत’ लेकर फिर से इन तंग गलियों में अवैध ओयो का संचालन शुरू करा दिया जाता है।
तंग गलियां और सुरक्षा मानकों की अनदेखी: बड़े हादसे को न्योता
लक्ष्मी नगर के मुख्य बाजारों और संकरी गलियों में चल रहे ये होटल कभी भी किसी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकते हैं:
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फायर ब्रिगेड का पहुंचना असंभव: जिन पतली गलियों में दो दोपहिया वाहन एक साथ ठीक से नहीं निकल पाते, वहां 4-5 मंजिला इमारतों में ओयो चलाए जा रहे हैं। आग लगने या आपात स्थिति में दमकल की गाड़ियों (Fire Tenders) का वहां तक पहुंचना पूरी तरह नामुमकिन है।
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बिना वेरिफिकेशन के आवाजाही: इन अवैध ओयो होटलों में आने-जाने वाले कमर्शियल और प्राइवेट विजिटर्स का कोई पुख्ता आईडी वेरिफिकेशन नहीं किया जा रहा है, जिससे इलाके की सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा पर भी गहरा संकट पैदा हो गया है।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार महकमे
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे कई बार कलेक्ट्रेट, नगर निगम और पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, लेकिन कोई भी विभाग ठोस और स्थायी कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। जनता का सीधा सवाल है— क्या दिल्ली का प्रशासनिक अमला किसी बड़े हादसे और मासूमों की बलि चढ़ने का इंतजार कर रहा है?
जब तक इन अवैध ओयो इमारतों को सील नहीं किया जाता और रिश्वत लेकर इन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर सख्त विभागीय और आपराधिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक लक्ष्मी नगर की तंग गलियों में सुरक्षा का यह संकट बरकरार रहेगा।
