IKS सम्मेलन: परंपरा और आधुनिकता

1. मुंबई: भारतीय ज्ञान पर अंतरराष्ट्रीय मंथन 🎓

न्यूज़: मुंबई के पवई स्थित चंद्रभान शर्मा कॉलेज में आयोजित 11वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन परंपरा और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुआ। “आईकेएस: ब्रिजिंग ट्रेडिशन, इनोवेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर आधारित इस मंच ने यह साबित कर दिया कि भारतीय ज्ञान प्रणालियां आज भी वैश्विक स्तर पर अत्यंत प्रासंगिक हैं। इस आयोजन में देश-विदेश के विद्वानों ने भारतीय दर्शन और आधुनिक विज्ञान के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए।

2. तकनीक और वैदिक ज्ञान का मेल जरूरी 💡

न्यूज़: सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. राजन वेलुकर ने युवाओं के लिए तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और वैदिक ज्ञान की समझ को अनिवार्य बताया। प्रभारी प्राचार्या डॉ. वैशाली राजपूत ने भारतीय परंपराओं को ज्ञान का अमूल्य स्रोत करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को अपनाकर ही छात्र एक संतुलित और सफल करियर का निर्माण कर सकते हैं।

3. शोध और भविष्य का नया मॉडल 🔍

न्यूज़: सम्मेलन के दौरान आईआईटी बॉम्बे के प्रो. डॉ. वरदराज बापट सहित कई विशेषज्ञों ने सतत विकास और नवाचार में भारतीय प्रणालियों की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला। इस दौरान 104 शोध पत्रों में से 85 का चयन किया गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती अकादमिक रुचि को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय वक्ता आलोक गुप्ता ने कहा कि वैश्विक कार्यप्रणालियों पर भारतीय दर्शन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जो एक समावेशी और सतत भविष्य की नींव रखेगा।


मुंबई (अनिल बेदाग)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )


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