कोडीन सिरप मामला: जज बोले- ब्लैक डे
कोडीन सिरप मामला: “न्यायपालिका के इतिहास का ब्लैक डे” – जज तक पहुंच बनाने की कोशिश पर भड़के हाईकोर्ट जस्टिस, खुद को सुनवाई से किया अलग
विशेष प्रादेशिक एवं कानूनी ब्यूरो: प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)
कोडीन युक्त कफ सिरप (Codeine Syrup) मामले में गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है। जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कृष्ण पहल तक कुछ वादकारियों द्वारा व्यक्तिगत संपर्क साधने और पहुंच बनाने का कथित प्रयास किया गया। इस बात से बेहद नाराज और क्षुब्ध होकर जस्टिस कृष्ण पहल ने इसे “हाईकोर्ट के इतिहास का काला दिन” (Black Day) करार देते हुए खुद को इन सभी याचिकाओं की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया है।
न्यायमूर्ति ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का बाहरी प्रभाव डालने का प्रयास सीधे तौर पर ‘कानून के शासन’ की गरिमा पर आघात है।
गुरुवार को शुरू होनी थी अंतिम सुनवाई
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, कोडीन कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी भोला जायसवाल समेत दर्जनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी।
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तारीख और उपस्थिति: अदालत ने इन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के लिए गुरुवार, 30 जुलाई की तारीख तय की थी। सुबह 10 बजे सुनवाई शुरू हुई, जिसमें याचियों के वकीलों के साथ राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय उपस्थित थे।
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जज की कड़ी नाराजगी: सुनवाई शुरू होते ही जज साहब ने कहा कि मामला पूरा सुनकर आदेश सुरक्षित रखा जा सकता था। हालांकि, वादकारी पक्षों द्वारा पीठासीन न्यायाधीश (Judge) तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचने और संपर्क स्थापित करने की अनुचित कोशिशें की गईं।
“न्यायपालिका की स्वतंत्रता नागरिकों की संवैधानिक गारंटी”
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस तरह के आचरण को नजरअंदाज किया गया, तो यह न्यायपालिका की निष्पक्षता की जड़ों को पूरी तरह कमजोर कर देगा और आम जनता का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।
अदालत की बड़ी टिप्पणी: “न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायाधीशों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त एक संवैधानिक गारंटी है। कोई भी ऐसी कोशिश जो यह आभास दे कि न्यायिक आदेश निजी संपर्कों के जरिए प्रभावित किए जा सकते हैं, वह न्याय प्रशासन के लिए गंभीर खतरा है। इसकी संस्थागत स्तर पर कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए।”
मामला मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया
इन ऐतिहासिक और कड़े दिशा-निर्देशों के बाद न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सभी संबंधित जमानत याचिकाओं को अपनी पीठ से मुक्त कर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि इन सभी मामलों को मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि इन्हें किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि ये याचिकाएं अब भविष्य में उनकी पीठ के सामने दोबारा पेश नहीं की जाएंगी।
सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
रिपोर्ट: क्राइम व लोकल न्यूज़ ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, बरेली (उत्तर प्रदेश)

