बिहार में चमकी बुखार को लेकर हाई अलर्ट
बिहार: चमकी बुखार से निपटने को सरकार अलर्ट; मुख्य सचिव की दो-टूक—”AES प्रबंधन में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं”
(पटना, बिहार): बिहार में हर साल गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए काल बनने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी ‘चमकी बुखार’ से निपटने के लिए बिहार सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है [cite: एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार से निपटने के लिए बिहार सरकार ने कमर कस ली है। , AES हर साल गर्मी में बिहार के बच्चों को प्रभावित करता है।]। इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है।
बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य कार्यबल (State Task Force) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
12 सबसे संवेदनशील जिलों में 24×7 अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने बैठक के दौरान एक विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य के सबसे प्रभावित 12 जिलों (मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर) को २४ घंटे अलर्ट पर रखा गया है [cite: 12 प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को 24×7 अलर्ट पर रखने के निर्देश दिए गए।, – 12 प्रभावित जिलों – मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर…]। इन जिलों में चिकित्सा संसाधनों, दवाओं और डॉक्टरों की उपलब्धता का लगातार गैप असेसमेंट (समीक्षा) किया जा रहा है [cite: …राज्य में AES प्रबंधन के लिए दवाओं, उपकरणों और डॉक्टरों की उपलब्धता का लगातार गैप असेसमेंट किया जा रहा है।]।
अस्पतालों में बेड्स और दवाओं की मुस्तैदी
चमकी बुखार से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तैयारियां की गई हैं:
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PICU की संख्या: प्रभावित जिलों में कुल 15 पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) पूरी तरह क्रियाशील कर दिए गए हैं।
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SKMCH मुजफ्फरपुर: श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में 100 बेड का विशेष हाईटेक PICU और 60 बेड का एक समर्पित एन्सेफलाइटिस वार्ड तैयार है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में 10 बेड का वार्ड और सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) स्तर पर बेड्स आरक्षित रखे गए हैं।
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जीवन रक्षक दवाएं: सभी PHC और CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) स्तर पर 28 प्रकार की तथा सभी मेडिकल कॉलेजों में 44 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं 100% उपलब्ध करा दी गई हैं।
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एम्बुलेंस नेटवर्क: मरीजों को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाने के लिए 959 सरकारी एम्बुलेंस मुस्तैद की गई हैं। यदि कोई परिवार मरीज को किसी निजी वाहन से अस्पताल लाता है, तो प्रशासन द्वारा उसे ऑन-द-स्पॉट नकद (कैश) भुगतान किया जाएगा।
मुख्य सचिव के कड़े और स्पष्ट निर्देश:
1. सुबह 4 से 6 बजे डॉक्टरों की 100% उपस्थिति अनिवार्य चमकी बुखार के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि 80% AES मामले सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच ही सामने आते हैं। इसलिए इस पीक ऑवर (महत्वपूर्ण समय) के दौरान सभी PHC और अस्पतालों में डॉक्टरों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। डॉक्टरों की हाजिरी और निगरानी ‘दर्पण प्लस ऐप’ तथा 104 हेल्पलाइन के जरिए की जाएगी, और गायब रहने वाले डॉक्टरों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।उन्होंने भावुक होते हुए यह भी कहा कि “कोई भी बच्चा रात को भूखे पेट नहीं सोना चाहिए”।
2. विभिन्न विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी:
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आंगनवाड़ी और आशा: कुपोषित बच्चों को तुरंत पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजें। आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस (ORS) और पैरासिटामोल का पर्याप्त स्टॉक रखें और कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त टेक होम राशन (THR) दें।
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ग्रामीण विकास व शिक्षा विभाग: जीविका दीदी और पंचायत के मुखिया बैठकों के जरिए ग्रामीण स्तर पर लोगों को लक्षणों के प्रति जागरूक करेंगे। शिक्षा विभाग अपने ‘सुरक्षित शनिवार’ कार्यक्रम के तहत स्कूलों में ‘चमकी को धमकी’ अभियान चलाएगा और मिड-डे मील में प्रोटीन युक्त आहार पर ध्यान देगा।
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PHED व पशुपालन: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को महादलित बस्तियों में पेयजल की जांच, चापाकालों की मरम्मत और पानी के क्लोरिनेशन के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पशुपालन विभाग को रिहायशी इलाकों से सुअर पालन केंद्रों को दूर रखने तथा सुअरों व जल पक्षियों में वायरल संक्रमण की सघन जांच करने को कहा गया है।
राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और सिविल सर्जनों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के अस्पतालों का नियमित और औचक निरीक्षण करें [cite: सभी डीएम और सिविल सर्जन को अस्पतालों का नियमित निरीक्षण और पंचायत स्तर पर रेफरल ट्रांसपोर्ट टैग करने का आदेश दिया गया है।]। साथ ही, ग्रामीण व पंचायत स्तर पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ‘रेफरल ट्रांसपोर्ट टैग’ करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि समय पर मासूमों की जान बचाई जा सके।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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