GST चोरी: करोड़ों का फर्जीवाड़ा पकड़ में

GST Scam: करोड़ों का चूना लगाने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार

नोएडा/गौतमबुद्ध नगर: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जीएसटी चोरी के एक बहुत बड़े खेल का खुलासा किया है फर्जी फर्में बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह के 5 सदस्यों को एसटीएफ ने नोएडा और बिहार के वैशाली से गिरफ्तार किया है यह गिरोह कूटरचित इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए असली फर्मों को अवैध ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) बेच रहा था

कोचिंग की आड़ में सिखाया ‘टैक्स चोरी’ का हुनर

एसटीएफ की पूछताछ में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है गिरोह का मुख्य सरगना बिंदेश्वर प्रसाद पाण्डेय गाजियाबाद में ‘हिंदुस्तान कोचिंग सेंटर’ चलाता था

  • वह छात्रों को अकाउंटेंसी, टैली और जीएसटी रिटर्न भरने की ट्रेनिंग देता था

  • ट्रेनिंग के बाद वह अपने होनहार छात्रों को ही फर्जी फर्में बनाने और बोगस इनवॉइस काटने के धंधे में शामिल कर लेता था

  • गिरफ्तार अभियुक्तों में दीपांशू और जयकिशन भी इसी कोचिंग के छात्र रह चुके हैं

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

गिरफ्तारी 13 दिसंबर 2025 को नोएडा और बिहार में की गई:

  1. बिंदेश्वर प्रसाद पाण्डेय (मास्टरमाइंड) – सुल्तानपुर

  2. बबलू कुमार – गोपालगंज, बिहार

  3. प्रिंस पाण्डेय – गोपालगंज, बिहार

  4. दीपांशू शर्मा – छपरा, बिहार

  5. जयकिशन – वैशाली, बिहार (बिहार से गिरफ्तार)

कैसे होता था करोड़ों का फर्जीवाड़ा?

यह गिरोह तकनीक का इस्तेमाल कर बेहद शातिराना तरीके से काम करता था:

  • बोगस फर्में: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्जनों बोगस फर्में रजिस्टर्ड की गई थीं

  • फर्जी ई-वे बिल: बिना किसी माल की खरीद-बिक्री के ही पोर्टल पर फर्जी सेल्स इनवॉइस और ई-वे बिल अपलोड कर दिए जाते थे

  • 50 से ज्यादा ईमेल आईडी: अभियुक्तों के मोबाइल से 50 से अधिक ईमेल आईडी मिली हैं, जिनका उपयोग ओटीपी प्राप्त करने और बैंक ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था

  • सर्कुलर ट्रेडिंग: असली फर्मों के साथ बैंक ट्रांजेक्शन दिखाकर पैसों का लेनदेन कागजों पर ‘वास्तविक’ बनाया जाता था, जबकि असल में कोई व्यापार नहीं होता था

बरामदगी और पुलिस की कार्रवाई

एसटीएफ ने इनके कब्जे से 04 लैपटॉप, 09 मोबाइल फोन और नगदी बरामद की है मोबाइल में मौजूद डेटा के शुरुआती विश्लेषण से पता चला है कि यह घोटाला करोड़ों रुपये का है कानपुर और बलरामपुर में दर्ज मुकदमों के आधार पर एसटीएफ ने इन जालसाजों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है


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