**गोरखपुर: नाले पर निर्माण की जांच शुरू**

गोरखपुर: नाले पर अतिक्रमण कर बनाए गए दो मंजिला मकान पर नगर निगम सख्त, 60 साल पुराने लीज रिकॉर्ड्स खंगालने की प्रक्रिया शुरू

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राजीव रंजन, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में जलभराव और नाला सफाई की राह में रोड़ा बन रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन ने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। ताजा मामला सावित्री अस्पताल के पास पुर्दिलपुर और दिलेजाकपुर की सीमा पर स्थित लगभग 40 फीट चौड़े नाले का है। इस विशालकाय नाले के ऊपर ही एक दो मंजिला पक्का मकान खड़ा कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र में जल निकासी और नाले की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। ‘दैनिक जागरण’ द्वारा इस गंभीर मुद्दे और इसके कारण पैदा हो रही जनसमस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और मामले की जांच व कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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दैनिक जागरण की खबर का बड़ा असर

सावित्री अस्पताल के पास बने इस नाले से पूरे क्षेत्र का बरसाती और गंदा पानी निकलता है। नाले के बड़े भू-भाग पर दो मंजिला मकान बन जाने से नाले का प्रवाह न केवल बाधित हुआ है, बल्कि नगर निगम की पोकलैंड और जेसीबी मशीनों के लिए सफाई करना असंभव हो गया था। दैनिक जागरण ने नाले पर बने इस निर्माण और उससे जनता को हो रही दिक्कतों को उजागर करते हुए प्रमुखता से खबर छापी थी। खबर का तत्काल संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने मामले की फाइलें खंगालने का आदेश जारी कर दिया।

छह दशक पुराने दस्तावेजों की हो रही जांच

नगर निगम प्रशासन ने इस जमीन और निर्माण से जुड़े पुराने अभिलेखों व कागजातों की गहराई से पड़ताल शुरू कर दी है। शुरुआती जांच-पड़ताल और अभिलेखों के अवलोकन से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि करीब छह दशक (60 वर्ष) पहले, जब गोरखपुर में नगर पालिका परिषद हुआ करती थी, तब इस जमीन को दो व्यक्तियों को लीज पर दिया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन नगर पालिका नियमों के तहत लीज किस शर्त पर दी गई थी, क्या लीज में नाले के ऊपर निर्माण करने की अनुमति थी या केवल अस्थायी उपयोग की छूट दी गई थी—इन सभी पहलुओं की सूक्ष्मता से समीक्षा की जा रही है।

नाला सफाई और जलभराव की समस्या बनी बड़ी वजह

गोरखपुर शहर को जलभराव से मुक्त कराने के लिए नगर निगम अभियान चला रहा है। ऐसे में पुर्दिलपुर और दिलेजाकपुर सीमा पर स्थित यह 40 फीट चौड़ा नाला शहर के जल निकासी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। नाले के ऊपर पक्के निर्माण के कारण नगर निगम के कर्मचारी नाले के भीतर जमा सिल्ट और कचरा नहीं निकाल पा रहे थे, जिससे हल्की बारिश में भी आसपास के मोहल्लों में पानी भरने का खतरा बना रहता है।

जांच के बाद होगी ध्वस्तीकरण या लीज निरस्तीकरण की कार्रवाई

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में लीज की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है या यह साबित होता है कि नाले के प्राकृतिक प्रवाह को रोककर अवैध रूप से पक्का दो मंजिला ढांचा खड़ा किया गया है, तो लीज निरस्त करने के साथ-साथ मकान को ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया जाएगा।

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि शहर में कहीं भी नाले, नालियों या सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह निर्माण कितना भी पुराना क्यों न हो।

प्रमुख बिंदु:

  • स्थान: सावित्री अस्पताल के पास, पुर्दिलपुर-दिलेजाकपुर सीमा, गोरखपुर।

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  • अतिक्रमण: 40 फीट चौड़े नाले के ऊपर बना दो मंजिला पक्का मकान।

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  • निगम की कार्रवाई: नगर पालिका के समय दिए गए 60 साल पुराने लीज दस्तावेजों की जांच शुरू।

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  • मुख्य उद्देश्य: नाले के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना और जलभराव की समस्या से मुक्ति दिलाना।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)


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