SC/ST Act के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की रैली के बाद आयोजित कथित “शुद्धिकरण” और हवन अनुष्ठान को लेकर देश में राजनीतिक और कानूनी विवाद गरमा गया है।
मामले से जुड़े प्रमुख तथ्य और कानूनी मांगें:
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कानूनी कार्रवाई की मांग: विपक्ष और कांग्रेस नेताओं (नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा) ने इस घटना को अस्पृश्यता (छुवाछूत) का प्रतीक और संविधान तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) का सीधा उल्लंघन बताया है। उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है।
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संसद में मुद्दा: इससे पूर्व, राज्यसभा में श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा था कि पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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आयोजकों एवं भाजपा का पक्ष: दूसरी ओर, अनुष्ठान करने वाले आयोजकों और स्थानीय भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कोई जातिगत या व्यक्ति-विशेष से जुड़ा विषय नहीं था। उनके अनुसार रैली के बाद मैदान में हुई गंदगी की सफाई और रामलीला मैदान की पवित्रता बनाए रखने हेतु हवन/सफाई की गई थी। वहीं, आयोजकों की शिकायत पर मामले को गलत मोड़ देने के आरोप में पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज की है।
संविधान और SC/ST अधिनियम का रुख:
भारत का संविधान (अनुच्छेद 17) अस्पृश्यता के किसी भी रूप में आचरण को पूर्णतः प्रतिबंधित करता है। इसके अतिरिक्त, SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत किसी व्यक्ति या स्थान के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव या अपमानजनक आचरण करना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है।
वर्तमान में, इस घटना को लेकर निष्पक्ष कानूनी जांच, एफआईआर और दंडात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया जारी है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

