लक्ष्मी नगर में अवैध अतिक्रमण पर ऑल राइट्स मैगजीन के संपादक की शिकायत के बाद भी वसूली का खेल जारी; पुलिस और नगर निगम एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा
“एमसीडी और दिल्ली पुलिस की मिलीभगत: लक्ष्मी नगर में अवैध अतिक्रमण और वसूली का खेल; ‘ऑल राइट्स मैगजीन’ के संपादक गोपाल अग्रवाल के सामने आया भ्रष्टाचार का सच”
विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट (ऑल राइट्स मैगजीन)
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में व्यस्त सड़कों और पटरियों पर चल रहा अवैध अतिक्रमण आम जनता के लिए मुसीबत बनता जा रहा है, लेकिन इसके पीछे का असल खेल प्रशासन, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है। हाल ही में ‘ऑल राइट्स मैगजीन’ के संपादक श्री गोपाल अग्रवाल द्वारा इस मुद्दे पर उठाई गई आवाज ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। थाना दिवस पर शिकायत लेकर पहुंचे संपादक के सामने जो सच आया, वह यहां की भ्रष्ट कार्यप्रणाली और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को बेनकाब करता है।
1. थाना दिवस पर शिकायत और एएसपी के आदेश के बाद भी धड़ल्ले से लगा ठेला
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तस्वीरें और शिकायत: संपादक श्री गोपाल अग्रवाल जी हाल ही में थाना दिवस के दौरान लक्ष्मी नगर क्षेत्र में चल रहे अवैध अतिक्रमण की शिकायत लेकर गए थे। उन्होंने वहां एक विशेष छोले-कुल्चे वाले और अन्य अतिक्रमण के खिलाफ प्रमाण के तौर पर तस्वीरें (Photos) भी दिखाईं।
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एसएचओ की संदिग्ध कार्यप्रणाली: शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एएसपी ने लक्ष्मी नगर क्षेत्र के एसएचओ को मौके पर जाकर सर्वे करने और अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन एसएचओ साहब जब मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने उस ठेले वाले को वही न्यूज और तस्वीरें दिखाईं और शायद कुछ वसूली करके वहां से रवाना हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज भी वह ठेला उसी स्थान पर वैसा ही लगा हुआ है, जो दिल्ली पुलिस की कार्यशैली और ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
2. एमसीडी और पुलिस का आरोप-प्रत्यारोप: जनता की आंखों में धूल
जब इस अवैध अतिक्रमण को लेकर एमसीडी से बात की गई, तो उनका अलग ही खेल सामने आया:
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एमसीडी का आरोप: नगर निगम (MCD) के अधिकारियों का कहना था कि “पुलिस वाले ही हमें ऑफिस में घंटों बिठाकर रखते हैं और जिनसे घूस लेते हैं, उन्हें पहले ही सतर्क कर देते हैं।”
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पुलिस का आरोप: वहीं, दूसरी तरफ पुलिस वालों का कहना है कि “हम एमसीडी को रोज पत्र लिखकर अवैध अतिक्रमण के बारे में सूचित करते हैं, परंतु एमसीडी वाले हमारी सुनते ही नहीं हैं।”
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निष्कर्ष: सफाई में ये दोनों महकमे (एमसीडी और दिल्ली पुलिस) एक-दूसरे पर सिर्फ ठीकरा फोड़ते हैं और आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलते हैं। इसके नतीजे में जमीन पर कोई काम नहीं होता, बल्कि सरकार की आंखों में धूल झोककर अवैध वसूली का पैसा आपस में दबा लिया जाता है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ का दृष्टिकोण: प्रशासनिक जवाबदेही पर कड़े सवाल
क्या दिल्ली पुलिस और एमसीडी का काम केवल आम जनता और पत्रकारों को चक्कर काटना और भ्रष्टाचार के जरिए अपनी जेब भरना रह गया है? जब एक प्रतिष्ठित पत्रकार और संपादक के द्वारा ठोस सबूत और तस्वीरें देने के बावजूद पुलिस और एमसीडी आपस में मिलकर कार्रवाई को रद्द कर देते हैं, तो यह साफ जाहिर होता है कि व्यवस्था कितनी खोखली हो चुकी है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ ऐसी भ्रष्ट और लापरवाह प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी और सच को सामने लाती रहेगी।
