729 में 728 वोट मिटाना सिस्टम की चोरी: राहुल गांधी

“हम नागरिक हैं या refugee?” – बेला क्लस्टर की झुग्गियों में रहने वाले भाई-बहनों का सीधा सवाल।

पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं, खेती-मज़दूरी कर रहे हैं, हर चुनाव में वोट दे रहे हैं। फिर भी 729 मतदाताओं में से 728 के नाम मिटा दिए गए।

कागज़ हैं। भारतीयता का सबूत है। मगर फिर भी ये बेचारे दफ्तर से दफ्तर, अफसर से अफसर भटक रहे हैं।

सिर्फ़ इसलिए कि गरीब हैं, क्या नागरिक का हक़ छीन लोगे? बेघर हैं, तो क्या मताधिकार भी छीन लोगे?

संविधान कहता है – एक व्यक्ति, एक वोट। और एक भी वोट मिटाना सिर्फ़ कार्रवाई नहीं, वोट की चोरी है।

और इस चोरी में नीचे से ऊपर तक जो भी शामिल हैं – सबका हिसाब होगा। इत्मीनान से होगा।

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