बहेड़ी में किसानों की जमीन पर विवाद

बरेली: किसानों की जमीन हड़पकर नीलामी का आरोप, भारतीय किसान यूनियन ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

विशेष रिपोर्ट

(बरेली): तहसील बहेड़ी के अंतर्गत आने वाले किसानों की भूमि को लेकर एक बेहद गंभीर और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ‘भारतीय किसान यूनियन (अ)’ के मंडल अध्यक्ष ठाकुर श्याम वीर सिंह चौहान के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार (06 जून 2026) को बरेली के मंडल आयुक्त (कमिश्नर) को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा [cite: जकुर श्याम वीर सिंह चौहान मंण्डल अध्यक्ष, सेवा में, मंडल आयुक्त महोदय, मंडल बरेली, ज्ञापन दिलाउ-6-6-2026]। ज्ञापन के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि तहसील के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से ‘केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी’ किसानों की बेशकीमती जमीनों को अवैध रूप से नीलाम करने का प्रयास कर रही है [cite: जिसको तहसील के अधिकारियों की मिली भगत से किसानों का नाम हटाकर अपना नाम दर्ज करवा लिया गया। इसी कारण केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी द्वारा इसी भूमि को नीलम करवाना चाहती है]।

35 साल के लिए ली थी किराए पर जमीन, राजस्व रिकॉर्ड से हटाया किसानों का नाम

मंडल आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में भारतीय किसान यूनियन ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया:

  • किराए की आड़ में धोखाधड़ी: केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी ने किसानों की भूमि को 35 वर्षों के लिए किराए (लीज) पर लिया था [cite: केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेड़ी द्वारा किसानों की भूमि किराए पर 35 वर्ष के लिए ली थी]।

  • अधिकारियों से सांठगांठ: आरोप है कि अनुबंध की अवधि के दौरान कंपनी ने बहेड़ी तहसील के अधिकारियों के साथ सांठगांठ की और राजस्व रिकॉर्ड से मूल किसान मालिकों के नाम हटवाकर अवैध रूप से अपना नाम दर्ज करवा लिया।

  • जल्दबाजी में नीलामी की कोशिश: चूंकि कंपनी भली-भांति जानती है कि वह इस भूमि की वास्तविक मालिक नहीं है, इसलिए वह कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए इस भूमि को जल्द से जल्द नीलाम करवाकर पल्ला झाड़ना चाहती है।

हाईकोर्ट में विचारधीन है मामला, नियमों को ताक पर रखकर हुई नीलामी

किसानों का पक्ष रखते हुए यूनियन ने साफ किया कि इस विवादित भूमि को लेकर माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में अब्दुल मलिक बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (मुकदम संख्या 124 / 2026) वर्तमान में विचाराधीन है [cite: जबकि किसानों द्वारा हाई कोर्ट में 124 / 2026 अब्दुल मलिक बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मुकदमा विचाराधीन है।]। इस संबंध में बहेड़ी के तहसीलदार को पहले ही लिखित रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन उन्होंने किसानों की न्यायसंगत बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया।

अधिवक्ताओं और किसान नेताओं ने इस नीलामी को सीधे तौर पर कोर्ट की अवहेलना और बड़ी वित्तीय अनियमितता बताया है:

“उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 189 के अनुसार, बोली लगाने वाले (क्रेता) को तय राशि नियमों के तहत जमा करनी होती है [cite: जबकि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 189 में केता द्वारा बोली की राशि को जमा किए जाने का उल्लेख है।]. इसके अलावा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने ‘मोहम्मद अहमद बनाम रणवीर सिंह (1995)’ के अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि नीलामी की 25% धनराशि केवल नकद (कैश) स्वीकार की जाएगी, उसे चेक के माध्यम से जमा नहीं कराया जा सकता [cite: माननीय सवर्वोच्च न्यायालय में मोहम्मद अहमद का बनाम रणवीर सिंह 1995 आई जे 187 के निर्णय में स्पष्ट किया गया है की नीलामी की 25% धनराशि चेक द्वारा जमा नहीं किया जा सकता, नकद होना चाहिए।]. लेकिन बहेड़ी तहसील में नियमों को ताक पर रखकर 25% राशि चेक से जमा की गई, जो सीधे तौर पर बड़े भ्रष्टाचार और मिलीभगत को साबित करता है [cite: केसर इंटरप्राइजेज लिमिटेड बहेडी की मिली भगत से बहेडी तहसील के अधिकारियों द्वारा यह नीलामी की गई है, जिसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि नीलामी की 25% धनराशि चेक द्वारा जमा की गई है, कुल मिलाकर साबित होता है कि भ्रष्टाचार हुआ है।].”

15 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन (अ) ने कमिश्नर से मांग की है कि जब तक उच्च न्यायालय से किसानों के इस मुकदमे का अंतिम निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक इस भूमि की नीलामी से जुड़ी किसी भी प्रकार की दंडात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए [cite: अतः श्रीमान जी से निवेदन है कि जब तक किसानों के मुकदमे का निस्तारण नहीं होता, तब तक नीलामी जैसी कोई भी कार्रवाई नहीं की जाए।]। इसके साथ ही, सच जानने के बावजूद जालसाजी में साथ देने वाले दोषी तहसील अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी जांच शुरू की जाए।

यूनियन के प्रमुख पदाधिकारियों (सूर्य प्रकाश गंगवार, आसिफ और तनवार) ने प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 14 जून 2026 तक इस मामले में दोषियों पर उचित कार्रवाई और नीलामी रद्द नहीं की गई, तो पीड़ित किसान और संगठन के कार्यकर्ता 15 जून 2026 से कमिश्नरी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।


बरेली से अमरजीत

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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