दिल्ली: ₹8,300 करोड़ की प्रदूषण योजना

दिल्ली सरकार का बड़ा कदम: विश्व बैंक के सहयोग से शुरू होगी ₹8,300 करोड़ की ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ परियोजना

नई दिल्ली: राजधानी में वायु प्रदूषण की गंभीर चुनौती से निपटने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए जल्द ही महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ परियोजना की शुरुआत की जाएगी। पर्यावरण विभाग की इस विशेष कार्ययोजना को विश्व बैंक (World Bank) सहित कई प्रमुख बहुपक्षीय संस्थाओं के सहयोग से धरातल पर उतारा जाएगा।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के ‘वायु प्रदूषण मिटिगेशन प्लान’ (Air Pollution Mitigation Plan) को तेजी से लागू करना और ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP) के लक्ष्यों को समय से पहले हासिल करना है। यह योजना दूरदर्शी सोच के साथ दिल्ली की ओर से ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन में एक बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान देगी।

परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें और बजट

  • 7 साल का रोडमैप: यह पर्यावरण विभाग की एक दीर्घकालिक योजना है, जिसे सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक (सात वर्षों के लिए) दिल्ली के सभी जिलों में समान रूप से लागू किया जाएगा।

  • ₹8,300 करोड़ की भारी-भरकम लागत: इस पूरी परियोजना को लागू करने में लगभग 8,300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

  • फंडिंग का फॉर्मूला: परियोजना की कुल लागत का 65 प्रतिशत हिस्सा विश्व बैंक द्वारा वित्तीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, जबकि शेष 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार खुद वहन करेगी।

इन 7 प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा काम

परियोजना के तहत दिल्ली के प्रदूषण के मुख्य कारकों को चिन्हित कर उन पर व्यापक स्तर पर काम किया जाएगा:

  1. परिवहन (Transport): सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देना।

  2. सड़क की धूल (Road Dust): सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग और डस्ट मिटिगेशन।

  3. सीएंडडी अपशिष्ट (C&D Waste): निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण।

  4. ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management): लैंडफिल साइट्स का प्रबंधन और कचरे का सही से निपटारा।

  5. उद्योग (Industries): फैक्ट्रियों और उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के कड़े मानक लागू करना।

  6. हरित क्षेत्र (Green Cover): दिल्ली के ग्रीन कवर को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण।

  7. जल प्रदूषण (Water Pollution): वायु प्रदूषण के साथ-साथ यमुना और अन्य जल स्रोतों को साफ रखना।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान: “यह केवल प्रदूषण को तात्कालिक रूप से नियंत्रित करने की कोई योजना नहीं है, बल्कि दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा, बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और एक टिकाऊ व सुरक्षित शहरी पर्यावरण उपलब्ध कराने की दिशा में हमारी सरकार का एक दीर्घकालिक निवेश है।”

10 जुलाई को होगी विशेष कार्यशाला

परियोजना की तैयारियों को अंतिम रूप देने, इसकी रूपरेखा तय करने और सभी संबंधित विभागों व एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल (समन्वय) स्थापित करने के लिए आगामी 10 जुलाई को दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला (Workshop) आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में सभी विभागों की भूमिकाएं और समयबद्ध क्रियान्वयन की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी।

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

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