लखनऊ में सीएम योगी का ‘जनता दर्शन’
‘जनहित ही सर्वोपरि, जनसेवा ही प्रतिबद्धता’: लखनऊ में सीएम योगी का ‘जनता दर्शन’, समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन को पारदर्शी तथा जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘जनता दर्शन’ एक सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने आज लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर राज्य के विभिन्न जनपदों से आए दर्जनों फरियादियों की समस्याएं व्यक्तिगत रूप से सुनीं।
“जनहित ही सर्वोपरि, जनसेवा ही प्रतिबद्धता” के मूलमंत्र को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद शासन व प्रशासन के अधिकारियों को आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध और न्यायपूर्ण निस्तारण करने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
विभिन्न जिलों से आए फरियादियों की सुनीं व्यथा
जनता दर्शन के दौरान प्रदेश के सुदूर ग्रामीण और शहरी इलाकों से पहुंचे नागरिकों ने भूमि विवाद, स्वास्थ्य उपचार के लिए आर्थिक सहायता, पुलिस प्रशासन से जुड़ी शिकायतों और सामाजिक योजनाओं के लाभ से संबंधित आवेदन मुख्यमंत्री के समक्ष रखे:
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संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण: मुख्यमंत्री ने स्वयं फरियादियों के पास जाकर उनके आवेदन पत्र स्वीकार किए और उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके हर न्यायसंगत अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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गंभीर बीमारियों के लिए आर्थिक मदद: इलाज के लिए पहुंचे पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एस्टीमेट की प्रक्रिया को तुरंत पूरा कर संबंधित अस्पतालों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से वित्तीय सहायता जारी की जाए।
अधिकारियों को दोटूक निर्देश: ‘लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई’
जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली या ढिलाई को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया:
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जमीनी स्तर पर समाधान: थानों और तहसील स्तर पर ही आम जनता की सुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लखनऊ की दौड़ न लगानी पड़े।
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जमीन कब्जेदारों पर नकेल: अवैध कब्जों और दबंगई से जुड़े मामलों में पुलिस और राजस्व टीम को संयुक्त रूप से पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह ‘जनता दर्शन’ केवल शिकायतों के संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक के मन में सरकार के प्रति विश्वास जगाने और ‘सुशासन’ को धरातल पर उतारने का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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