नीमच में बालरंगमंच कार्यशाला

कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा नीमच में 30 दिवसीय बालरंगमंच कार्यशाला आयोजित: 26 जुलाई को टाउन हॉल में होगा समापन

नई दिल्ली/नीमच: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली की चिल्ड्रन्स विंग के तत्वाधान में मध्य प्रदेश के नीमच में एक भव्य 30 दिवसीय बालरंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कलाव्योम फाउंडेशन और रंगाभास नाट्यशाला के संयुक्त सहयोग से इस कार्यशाला का सफल संचालन नीमच स्थित फ्यूचर प्राइड स्कूल में किया जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, अभिनय कौशल और कलात्मक समझ को विकसित करना है।

कार्यशाला में बारीकियों को सीख रहे हैं बच्चे

कार्यशाला के दौरान बच्चों को रंगमंच और कला के विभिन्न आयामों से रूबरू कराया जा रहा है, जिसमें विशेषज्ञ प्रशिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • रंगमंच और चित्रकला का अनूठा संगम: कार्यशाला की सहनिर्देशिका एवं प्रशिक्षिका सावित्री जी बच्चों को रंगमंच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रशिक्षण दे रही हैं। इसके तहत विशेष चित्रकला क्लास आयोजित की जा रही है, जिसमें बच्चे अपने ‘ड्रीम होम’ और ‘ड्रीम ट्री’ की कल्पना को कैनवास पर उतार रहे हैं।

  • व्यक्तित्व विकास और थियेटर गेम्स: बच्चों को थिएटर गेम्स, स्टोरी टेलिंग (कहानी सुनाना) तथा वॉयस एंड स्पीच (आवाज और संवाद अदायगी) की कला सिखाई जा रही है। इसके साथ ही अभिनय के मुख्य सिद्धांतों जैसे फोकस, गोल, एक्शन और रिएक्शन की बारीकियों को भी समझाया जा रहा है।

  • लेखन और इम्प्रोवाइजेशन: बच्चे न केवल अभिनय कर रहे हैं, बल्कि खुद की कहानियां भी लिख रहे हैं और ‘इम्प्रोवाइजेशन’ (तत्काल अभिनय सुधार) के माध्यम से उन्हें मंच पर प्रस्तुत करने का अभ्यास कर रहे हैं।

  • मूवमेंट, संगीत और कोरियोग्राफी: कार्यशाला के निर्देशक सुशील कान्त मिश्रा बच्चों को शारीरिक मूवमेंट्स का गहन अभ्यास करवा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को सिखाया कि कैसे अलग-अलग मूवमेंट्स मिलकर एक सुंदर कोरियोग्राफी का रूप लेते हैं। इसके अलावा कार्यशाला में संगीत प्रशिक्षण, गीत लेखन और उन्हें सुंदर धुन में पिरोने का हुनर भी सिखाया जा रहा है।

“निरंतर अभ्यास ही अभिनेता की असली पूंजी”

निर्देशक सुशील कान्त मिश्रा ने नाट्यशास्त्र में अभिनय पर लिखे प्राचीन श्लोकों को जीवन का मूल मंत्र मानकर अभ्यास करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा:

“एक अच्छे अभिनेता के लिए निरंतर पढ़ना-लिखना, हर विषय के प्रति जागरूक रहना, अपने शहर, परिवार और दुनिया के इतिहास की जानकारी रखना तथा साहित्य का गहरा ज्ञान होना बेहद जरूरी है। हमारे शरीर रूपी सभी टूल्स का निरंतर और सही अभ्यास ही एक सच्चे अभिनेता की असली और स्थायी पूंजी है।”

इस रचनात्मक माहौल में नीमच के बच्चों का उत्साह भी देखते ही बन रहा है। कार्यशाला में प्रशिक्षार्थियों का रुझान दिन-प्रतिदिन लगातार बढ़ रहा है और सभी बच्चे दी जाने वाली हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।

26 जुलाई को टाउन हॉल में सजेगा समापन समारोह

इस 30 दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन 26 जुलाई 2026 को टाउन हॉल, नीमच (मध्य प्रदेश) में आयोजित किया जाएगा। इस समापन समारोह के मुख्य आकर्षण स्वयं बच्चे होंगे, जो अपने 30 दिनों के अनुभव के आधार पर खुद की लिखी और तैयार की गई विशेष नाट्य प्रस्तुति को मंच पर जीवंत करेंगे। इस अंतिम प्रस्तुति को सफल बनाने के लिए बच्चे इन दिनों टाउन हॉल के मंच के लिए निरंतर कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।


रिपोर्ट: आशीष रंजन, पत्रकार

  1. (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

     (एडिटर (Allrights Magazine)


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