बीजेपी नेता का भतीजा जांच में फंसा
बरेली: 8 मुकदमों वाले ‘दबंग’ को पुलिस ने दी क्लीन चिट, उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री के करीबी का पासपोर्ट कांड उजागर
बरेली | रिपोर्ट: रोहिताश कुमार
उत्तर प्रदेश के बरेली में खाकी और रसूख के गठजोड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जोगीनवादा गोलीकांड के मुख्य आरोपी सौरभ राठौर के खिलाफ आठ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद, स्थानीय पुलिस ने उसकी पासपोर्ट रिपोर्ट में उसे ‘बेदाग’ बता दिया। मामला खुलने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है और दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है।
कौन है सौरभ राठौर?
सौरभ राठौर कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति और चर्चित बीजेपी नेता पप्पू गिरधारी का भतीजा है। सौरभ का नाम जोगीनवादा इलाके में दबंगई, फायरिंग और जानलेवा हमलों के लिए कुख्यात रहा है।
खाकी की मेहरबानी: 8 मुकदमों के बाद भी ‘क्लीन’ रिपोर्ट
सौरभ राठौर पर आर्म्स एक्ट, बलवा और जानलेवा हमले जैसे 8 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। दिसंबर 2024 में एक अधिवक्ता परिवार पर हुए हमले में भी उसका नाम शामिल था। इसके बावजूद:
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12 नवंबर 2024 को बारादरी थाने के दरोगा रोहित शर्मा और सिपाही दीपक तोमर ने सत्यापन रिपोर्ट में खेल किया।
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रिपोर्ट में 7 मुकदमों को पूरी तरह छिपा लिया गया और उसे “दूध का धुला” साबित कर दिया गया।
एसएसपी का एक्शन: वेतन कटा और पासपोर्ट होगा निरस्त
साल 2025 में जब इस ‘कागजी बाजीगरी’ का पर्दाफाश हुआ, तो एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले की जांच मो. अकमल खान को सौंपी। जांच में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत साफ होने के बाद एसएसपी ने कड़ा रुख अपनाया है:
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अर्थदंड: दोषी दरोगा रोहित शर्मा और सिपाही दीपक तोमर पर 7 दिन के वेतन के बराबर जुर्माना लगाया गया है।
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पासपोर्ट निरस्तीकरण: आरोपी सौरभ राठौर का पासपोर्ट रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सिस्टम पर सवालिया निशान
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि सिस्टम की साख पर भी सवाल उठाता है। यह सवाल खड़ा होता है कि क्या रसूखदारों के लिए कानून के नियम बदल जाते हैं? अगर पुलिस ही अपराधियों को संरक्षण देगी, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या होगा?

