बिहार: टीबी मुक्त मिशन की शुरुआत

टीबी-मुक्त बिहार मिशन: 14 अगस्त तक 1 करोड़ जांच का लक्ष्य, हर ब्लॉक में तैनात होंगे नोडल अफसर

पटना: ‘टीबी-मुक्त भारत अभियान’ के तहत बिहार को इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह आजाद कराने के लिए राज्य सरकार ने अपनी ताकत झोंक दी है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग और सभी जिलाधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने आगामी 14 अगस्त 2026 तक राज्य में 1 करोड़ लोगों की टीबी स्क्रीनिंग का बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। मुख्य सचिव ने इसे राष्ट्रीय महत्व का अभियान बताते हुए सभी विभागों और अफसरों को ‘मिशन मोड’ में काम करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

वर्तमान स्थिति पर जताई गहरी चिंता

मुख्य सचिव ने बैठक में राज्य के मौजूदा आंकड़ों को सामने रखते हुए धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया:

  • लक्ष्य से काफी पीछे: राज्य में टीबी जांच के लिए तय की गई 2.76 करोड़ की लक्षित आबादी में से अब तक केवल 0.39 करोड़ (महज 14%) लोगों की ही स्क्रीनिंग हो सकी है।

  • जिलों का लचर प्रदर्शन: बिहार के अधिकांश जिलों में अब तक का कवरेज 20% से भी कम है, जिसे मुख्य सचिव ने बेहद चिंताजनक बताया और इसमें तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

मिशन मोड अभियान के तहत 5 मुख्य निर्देश:

1. हर ब्लॉक में नोडल अफसर और सख्त निगरानी

अभियान की दैनिक निगरानी के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। अब राज्य के प्रत्येक ब्लॉक (प्रखंड) में वरीय उप समाहर्ता (Senior Deputy Collector) स्तर के नोडल पदाधिकारी तैनात किए जाएंगे। ये अधिकारी राज्य के लिए निर्धारित साप्ताहिक 9.42 लाख स्क्रीनिंग के लक्ष्य की रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे।

2. माइक्रोप्लान के तहत लगेंगे विशेष कैंप

राज्य की 674 आरबीएसके (RBSK) मोबाइल हेल्थ टीमों को फील्ड में उतारा जाएगा। ये टीमें एक सुव्यवस्थित माइक्रोप्लान के तहत सभी स्कूलों, हॉस्टलों, महादलित टोलों और जेलों में विशेष जांच कैंप आयोजित करेंगी। जांच की प्रगति को पारदर्शी बनाए रखने के लिए रोजाना का डेटा ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।

3. सभी सरकारी विभागों की जवाबदेही तय

इस महा-अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों को सामूहिक जिम्मेदारी सौंपी गई है:

  • शिक्षा विभाग: सभी सरकारी स्कूलों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 100% छात्र-छात्राओं की जांच सुनिश्चित करेगा।

  • अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग: इसके तहत काम करने वाले ‘विकास मित्र’ महादलित टोलों के वंचित लोगों को प्रेरित कर जांच कैंपों तक लेकर आएंगे।

  • ग्रामीण विकास विभाग: ‘जीविका दीदियां’ स्वयं सहायता समूहों (SHG) की बैठकों में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाएंगी और ग्रामीणों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के कैंपों से जोड़ेंगी।

  • पंचायती राज विभाग: गांवों के मुखिया और वार्ड सदस्य स्वयं ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों को गोद लेंगे।

4. जांच की गति बढ़ाने के लिए कड़े टारगेट

जांच और स्क्रीनिंग की रफ्तार को बढ़ाने के लिए उपकरणों और केंद्रों के अनुसार दैनिक लक्ष्य तय किए गए हैं:

  • हर आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर रोजाना कम से कम 10 और प्रत्येक मोबाइल टीम द्वारा रोज 100 लोगों की स्क्रीनिंग अनिवार्य होगी।

  • बीमारी की सटीक पुष्टि के लिए आधुनिक ट्रूनेट (TrueNat) और CBNAAT मशीनों का उपयोग किया जाएगा।

  • फिक्स्ड एक्स-रे (X-Ray) मशीन से प्रतिदिन 20 और हैंड-हेल्ड (पोर्टेबल) एक्स-रे मशीन से रोजाना 50 जांच का टारगेट रखा गया है।

5. मरीजों के पोषण पर विशेष फोकस (फूड बास्केट)

टीबी के इलाज में पोषण की महत्ता को देखते हुए बड़े कॉरपोरेट और संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। IOCL, NTPC, POWERGRID, BSPTCL और रेड क्रॉस के सौजन्य से सभी पंजीकृत निक्षय मित्रों के माध्यम से प्रत्येक चिन्हित टीबी मरीज तक शत-प्रतिशत ‘फूड बास्केट’ (पोषण सामग्री) पहुंचाना अनिवार्य किया गया है।

लापरवाही पर मिलेगी सख्त सजा

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इस स्वास्थ्य अभियान में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलाधिकारियों (DM) को आदेश दिया गया है कि वे हर हफ्ते खुद इस अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे ताकि 14 अगस्त की तय समय-सीमा के भीतर 1 करोड़ जांच का लक्ष्य हासिल कर बिहार को टीबी मुक्त बनाया जा सके।


रिपोर्ट: नरेश अग्रवाल, पटना (बिहार)

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)


पटना मेट्रो: मलाही पकड़ी स्टेशन शुरू!

https://wp.me/p9lpiM-OB1मजदूरों के लिए नई मुआवज़ा नीति जल्दvV

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: