कचरे के पहाड़ों से बने सुंदर पार्क: ‘स्वच्छ भारत मिशन’ से बदल रही शहरों की तस्वीर

“कचरे के पहाड़ों से लेकर हरे-भरे जन-स्थानों तक: ‘स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन’ से कैसे बदल रही है भारतीय शहरों की तस्वीर”

नई दिल्ली: एक समय जिन लैंडफिल साइट्स (कचरे के ढेरों) को शहरों के लिए कलंक और गंभीर स्वास्थ्य संकट माना जाता था, वे अब ‘स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0’ (Swachh Bharat Mission-Urban) के तहत पुनरुद्धार और सतत विकास के मॉडल में बदल रही हैं। एक रीक्लेम्ड (पुनरुद्धार की गई) डंपसाइट केवल जीर्णोद्धार की गई भूमि भर नहीं है; यह शहरी कचरा प्रबंधन के प्रति भारत के बदलते दृष्टिकोण और पर्यावरणीय दूरदर्शिता का एक जीवंत उदाहरण है।

गोरखपुर, दिल्ली, नागपुर और रायचूर जैसे विभिन्न राज्यों के छोटे-बड़े शहरों में यह बदलाव एक ही तर्ज पर दिख रहा है—कचरे के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों की खुदाई (Biomining), वैज्ञानिक छंटाई और फिर उस ज़मीन को जनता के उपयोग योग्य उपजाऊ व सार्वजनिक भू-भाग में बदलना।

1. बायोमाइनिंग तकनीक से कचरे के पहाड़ों का खात्मा

स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के तहत देश के प्रमुख शहरों में दशकों पुराने लेगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) को खत्म करने के लिए आधुनिक बायोमाइनिंग (Biomining) और बायो-रेमेडिएशन (Bioremediation) तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है:

  • उत्खनन और छंटाई: कचरे के ढेरों को खोदकर उनमें से प्लास्टिक, शीशा, धातु, और रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) को अलग किया जाता है।

  • पुनर्चक्रण और उपयोग: अलग किए गए प्लास्टिक और RDF का उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में तथा मलबे (C&D Waste) का उपयोग सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है।

  • पारिस्थितिकी की बहाली: मिट्टी को शोधित कर उसमें फिर से पेड़-पौधे लगाने योग्य वातावरण तैयार किया जा रहा है।

2. स्वच्छता से आगे: जन-स्थानों और पारिस्थितिकी का निर्माण

‘स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन’, जिसकी शुरुआत प्राथमिक रूप से शौचालय निर्माण और बुनियादी स्वच्छता (Sanitation) से हुई थी, अब शहरों के पुनर्विकास और हरित क्रांति का प्रमुख स्तंभ बन चुका है:

  • पब्लिक स्पेस और सिटी पार्कों का निर्माण: दिल्ली के गाजीपुर/ओखला, गोरखपुर और नागपुर जैसे स्थानों पर रीक्लेम की गई भू-भाग पर अब सुंदर सार्वजनिक पार्क, खेल के मैदान, हरित पट्टियां (Green Belts) और वॉकवे बनाए जा रहे हैं।

  • नागरिकों का सुगम जीवन (Ease of Living): डंपसाइट्स के आसपास रहने वाले लाखों लोगों को बदबू, जहरीले धुएं, दूषित भूजल और बीमारियों से मुक्ति मिली है। ये स्थान अब लोगों के एकत्र होने, टहलने और खेलने-कूदने के केंद्र बन रहे हैं।

शहरी विकास की नई दिशा

शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, इस मॉडल से न केवल अरबों रुपये की बहुमूल्य सरकारी व सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराया गया है, बल्कि शहरों के कार्बन फुटप्रिंट में भी भारी कमी आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों के सहयोग से तैयार की जा रही विजुअल रिपोर्ट्स यह दर्शाती हैं कि भविष्य का भारत स्वच्छता के साथ-साथ टिकाऊ शहरी विकास की ओर तेजी से अग्रसर है।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ पर्यावरण संरक्षण, शहरी पुनरुद्धार और भारत के इस निरंतर बदलते स्वरूप पर अपनी रिपोर्टिंग जारी रखेगी।

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