बरेली: प्रीपेड मीटर पर भड़के व्यापारी

स्मार्ट मीटर के खिलाफ व्यापारियों का हल्लाबोल: चीफ इंजीनियर को सौंपा ज्ञापन, अवैध वसूली का लगाया आरोप

बरेली: स्मार्ट (प्रीपेड) मीटरों से जुड़ी तकनीकी खामियों और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ बरेली के व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश के बैनर तले सैकड़ों व्यापारियों ने जिला अध्यक्ष अकरम खान के नेतृत्व में बिजली विभाग के कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) ई. ज्ञानेंद्र सिंह को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।


प्रीपेड मीटर: सुविधा कम, सिरदर्द ज्यादा

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि जब से प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गई हैं। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याएं उठाई गईं:

  • तकनीकी खामियां: मोबाइल ऐप पर रिचार्ज करने के बाद भी डेटा अपडेट नहीं होता, जिससे पैसे कटने के बावजूद बिजली गुल रहती है।

  • अघोषित कटौती: बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के बार-बार बिजली काट दी जाती है।

  • अवैध वसूली: व्यापारियों का आरोप है कि विभाग वर्षों पुराने बकाये के नाम पर उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली कर रहा है, जिसकी कोई पारदर्शिता नहीं है।

  • डेटा पोर्टल की सुस्ती: नया मीटर लगने के बाद भी उपभोक्ताओं की जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं की जा रही, जिससे बिलिंग में भारी गड़बड़ी हो रही है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

संगठन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांग पत्र भी सौंपा, जिसमें बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए कड़े सुझाव दिए गए हैं:

  1. अनिवार्यता खत्म हो: स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर उपभोक्ताओं को मैन्युअल मीटर का विकल्प भी दिया जाए।

  2. गारंटी और प्रमाणिकता: हर मीटर पर कम से कम 5 साल की गारंटी दी जाए और उपभोक्ताओं को मीटर से संबंधित सभी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएं।

  3. हेल्पलाइन: शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम को प्रभावी बनाया जाए ताकि तकनीकी खराबी का तुरंत समाधान हो सके।

व्यापारी एकजुट

इस विरोध प्रदर्शन में महामंत्री कमल गुप्ता, डॉ. मुनिन्द्र प्रताप सिंह, जावेद, परवेज, रिजवान, राजेश दिवाकर समेत बड़ी संख्या में व्यापारी नेता और सदस्य मौजूद रहे। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रीपेड मीटर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और अवैध वसूली बंद नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

निष्कर्ष: स्मार्ट मीटर योजना जो बिजली चोरी रोकने और बिलिंग सुधारने के लिए लाई गई थी, अब बरेली में विभागीय लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते जनता के गले की फांस बनती जा रही है।

रोहिताश कुमार भास्कर

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर(Allrights Magazine)

 

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