बरेली: बारिश में डूबी ‘स्मार्ट सिटी’
करोड़ों की ‘स्मार्ट सिटी’, फिर भी एक बारिश में जलमग्न बरेली: व्यापारियों का लाखों का नुकसान, नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी बजट का खेल
बरेली: करोड़ों रुपये के बजट से ‘स्मार्ट सिटी’ का तमगा हासिल करने वाला बरेली शहर मानसून की एक ही मध्यम बारिश में पूरी तरह घुटनों पर आ गया है। शहर के मुख्य बाजारों, रिहाइशी इलाकों और चौराहों पर जलभराव के कारण न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों का लाखों रुपये का सामान दुकानों में पानी भरने से बर्बाद हो गया है। जगह-जगह सड़कों पर गाड़ियां बंद हो गईं और जनता घंटों जाम व गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर रही।
इस तबाही ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों द्वारा ‘नाला सफाई’ और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर किए गए दावों की पोल खोलकर रख दी है।
व्यापारियों की कमर टूटी, जलभराव से हाहाकार
बारिश के बाद बरेली के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई:
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दुकानों में घुसा गंदा पानी: नालों का गंदा पानी दुकानों और गोदामों के भीतर भर गया, जिससे रेडीमेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, राशन और अन्य सामान पूरी तरह सड़ गए। व्यापारियों का आरोप है कि नाला सफाई के नाम पर केवल सड़कों के किनारे की गाद (Silt) निकालकर छोड़ दी गई, जो बारिश में बहकर वापस नालों में समा गई।
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सड़कों पर बंद पड़े वाहन: शहर के प्रमुख मार्गों पर 2 से 3 फीट तक पानी भर जाने के कारण दर्जनों दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच सड़क पर ही बंद हो गए, जिससे पूरे शहर में भीषण ट्रैफिक जाम लग गया।
कागजी सफाई छोड़ ‘वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान’ लागू करने की सख्त जरूरत
स्मार्ट सिटी का दर्जा केवल रंग-रोगन और लाइटें लगाने से नहीं मिलता, बल्कि मजबूत और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे से मिलता है। ‘ऑल राइट्स मैगजीन’ इस स्थिति के स्थायी समाधान के लिए निम्नलिखित ठोस एवं वैज्ञानिक सुधारों की मांग करती है:
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ड्रोन मैपिंग और जीआईएस (GIS) सर्वे: बरेली शहर के पूरे ड्रेनेज सिस्टम का ड्रोन मैपिंग के जरिए सर्वे कराया जाए ताकि पानी के स्वाभाविक ढलान (Natural Flow) और अवरुद्ध नालों की सटीक लोकेशन का पता चल सके।
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वैज्ञानिक मास्टर ड्रेनेज प्लान: दशकों पुराने और संकरे नालों की जगह modern ग्रैविटी-बेस्ड ड्रेनेज नेटवर्क तैयार किया जाए जो भारी बारिश का पानी भी तुरंत शहर से बाहर निकाल सके।
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हर पार्क में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य: शहर के सभी सरकारी पार्कों, स्कूलों और बहुमंजिला इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग (Rainwater Harvesting) सिस्टम अनिवार्य किया जाए, जिससे बारिश के पानी का संचयन हो सके और सड़कों पर जलभराव न हो।
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सफाई बजट का ऑडिट: नगर निगम द्वारा हर साल नाला सफाई के नाम पर खर्च किए जाने वाले करोड़ों रुपये का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों व नगर निगम अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
यदि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बरेली के ड्रेनेज सिस्टम को वैज्ञानिक तरीके से री-डिजाइन नहीं किया गया, तो हर बारिश में जनता का पैसा और व्यापारियों का व्यापार ऐसे ही गंदे पानी में बहता रहेगा।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
