बरेली दंगा: असलहा सप्लायर गिरफ्तार

बरेली दंगा साजिश का बड़ा खुलासा: झुमका तिराहे से सप्लाई हुए थे असलहे, मुदस्सिर मिर्जा गिरफ्तार

बरेली: शहर को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंकने वाली गहरी साजिश की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। बरेली पुलिस ने दंगे में हथियारों की सप्लाई करने वाले एक मुख्य आरोपी मुदस्सिर मिर्जा उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर लिया है। मुदस्सिर की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि दंगे के दौरान इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए शहर में लाए गए थे।


झुमका तिराहा बना था असलहों का ‘डिलीवरी पॉइंट’

पुलिस की पूछताछ में मुदस्सिर ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

  • साजिश में साझेदारी: मुदस्सिर ने स्वीकार किया कि उसने पार्षद अनीस सकलैनी (जो पहले से जेल में है) के साथ मिलकर बरेली के प्रसिद्ध झुमका तिराहे से हथियारों की एक बड़ी खेप उठाई थी।

  • वीडियो कॉल से पहचान: जांच में सामने आया कि हथियारों की डिलीवरी देने वालों ने वीडियो कॉल के जरिए पहचान कन्फर्म करने के बाद ही मुदस्सिर और अनीस को असलहे सौंपे थे।

  • दंगे में इस्तेमाल: पुलिस का दावा है कि हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों पर जो फायरिंग हुई थी, उसमें इन्हीं असलहों और गोलियों का इस्तेमाल किया गया था।

कानपुर विवाद की आड़ में रची गई साजिश

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर को बरेली में भड़की हिंसा कोई इत्तेफाक नहीं थी:

  1. माहौल बिगाड़ने की कोशिश: आरोप है कि मौलाना तौकीर रजा ने कानपुर के ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद का सहारा लेकर भड़काऊ बयानबाजी की, जिससे शहर का माहौल खराब हुआ।

  2. पुलिस पर हमला: उपद्रवियों ने न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि पुलिस टीम पर एसिड, पेट्रोल बम और गोलियों से भी हमला किया, जिसमें कई जवान घायल हुए थे।

  3. कार्रवाई: इस हिंसा के संबंध में अब तक 5 थानों में 10 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 94 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

असलहा नेटवर्क का मास्टरमाइंड: इशरत अली

पुलिस जांच की सुई अब इशरत अली की ओर घूम गई है, जिसे इस पूरे आर्म्स नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इशरत अली, मौलाना के करीबी फरहत का भाई है और वह हथियारों की सप्लाई के पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था। 19 फरवरी को पकड़े गए आरोपियों (सोमू खान और तस्लीम) ने भी इशरत और झुमका तिराहे वाली इस डील की पुष्टि की थी।

CCTV फुटेज ने पुख्ता किए सबूत

साजिश को बेनकाब करने में तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। झुमका तिराहे और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में मुदस्सिर मिर्जा और पार्षद अनीस सकलैनी को हथियारों की खेप रिसीव करते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया। इसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर मुदस्सिर को दबोचा।

वर्तमान स्थिति: इशरत अली पहले ही एक अन्य मामले में आत्मसमर्पण कर चुका है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य छोटे-बड़े चेहरों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दंगे की साजिश के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही कुछ और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

(रिपोर्ट: सौरभ गुप्ता, बरेली)

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर(Allrights Magazine)

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