Bareilly News : रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली का 22 वां दीक्षांत राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के हाथ से मिले गोल्ड मेडल

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के 22 वां दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल पहुंची हैं। विश्वविद्यालय कैंपस और कॉलेजों से जुड़े 84 टॉपर छात्रों को गोल्ड मेडल दिए जा रहे हैं। इनके अलावा 94 PHed छात्रों को डिग्री दी जा रही है। सामान्य छात्रों में 4500 छात्रों को डिग्रियां दी जानी हैं। आज सिर्फ टॉपर और पीएचडी करने वाले छात्र ही दीक्षांत में शामिल हुए हैं।

विदेशी फूलों से सजाया गया विश्वविद्यालय

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को विदेशी फूलों से सजाया गया है। सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय कैंपस और आसपास 1 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल 11 बजे कैंपस में पहुंची। महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में अटल सभागार का भी शुभारंभ किया गया। इसे ऑडिटोरियम का रूप दिया गया है। इसी में दीक्षांत समारोह रखा गया है। थाईलैंड के व्हाइट स्टार फूल, कोलकाता का गेंदा, और दिल्ली और बेंगलुरु से भी अलग अलग प्रकार के फूल सजावट में मंगाए गये हैं।

650 लोगों को आमंत्रित किया गया

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ राजीव कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम योगेंद्र उपाध्याय मंत्री उच्च शिक्षा विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी, केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर गुजरात से प्रो. रजत मूना और जनप्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। इनके अलावा 650 लोगों को आमंत्रित किया गया है। कैंपस के सभी शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन के अलावा विश्वविद्यालय के कॉलेजों के सभी प्राचार्य भी शामिल रहेंगे। कोविड को देखते हुए कार्यक्रम में मास्क अनिवार्य किया गया है।

विश्वविद्यालय एक नजर में

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली आज प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। यह बरेली और मुरादाबाद मंडल के 9 जिलों का विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय में 6 लाख छात्र विश्वविद्यालय कैंपस और कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि इस विवि कैंपस में 3010 छात्र छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। 25 विभाग हैं, जिनमें 120 प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 20 जनवरी 1974 को बरेली विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। 5 दशक के लंबे आंदोलन के बाद रुहलेखंड को अपना विश्वविद्यालय मिला था।

ब्यूरो रिपोर्ट , आल राइट्स मैगज़ीन

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