बरेली: आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक
बरेली: सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक, नगर आयुक्त से शिकायत कर कार्रवाई की मांग
बरेली शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब आम नागरिकों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गया है। आए दिन होने वाले हमलों और कुत्तों के बढ़ते झुंडों ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में दहशत पैदा कर दी है।
राहगीर और बच्चे निशाने पर
शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ आवारा कुत्तों ने राहगीरों को अपना शिकार बनाया है:
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रेबीज का खतरा: कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का डर सता रहा है।
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समय का संकट: सुबह नमाज के लिए जाने वाले लोग, स्कूल जाने वाले बच्चे और देर रात ड्यूटी से लौटने वाले कर्मचारी इन कुत्तों के हमलों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
नगर आयुक्त से की गई शिकायत
ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के प्रदेश संगठन मंत्री मुख्तार अहमद ने इस समस्या को लेकर नगर आयुक्त से मुलाकात की और तत्काल समाधान की मांग की। उन्होंने बताया कि रात के समय कुत्तों के झुंड सड़कों पर सक्रिय रहते हैं, जिससे लोग अकेले निकलने से कतरा रहे हैं।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
मुख्तार अहमद और स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की है:
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पकड़ने का अभियान: शहर के भीड़भाड़ वाले और प्रभावित इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
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नसबंदी और टीकाकरण: कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और रेबीज को रोकने के लिए एंटी-रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
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रात्रि गश्त: प्रभावित क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाई जाए ताकि पैदल चलने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
आमजन की मांग
शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। आवारा पशुओं और कुत्तों के कारण सड़कों पर चलना दूभर हो गया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- रोहिताश कुमार भास्कर पत्रकार
- सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

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