महिला आरक्षण: मौलाना रजवी की राय
महिला आरक्षण बिल का स्वागत, पर मुस्लिम महिलाओं को सियासत से दूर रहने की सलाह: मौलाना शाहबुद्दीन रजवी
महिला आरक्षण बिल और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक बड़ा बयान दिया है। जहाँ उन्होंने केंद्र सरकार की इस पहल की सराहना की है, वहीं मुस्लिम महिलाओं के सक्रिय राजनीति में आने को लेकर अपनी अलग राय व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री की पहल का स्वागत
मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने महिला आरक्षण बिल में संशोधन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा:
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सकारात्मक कदम: आधी आबादी को आरक्षण देना उन्हें बराबरी का अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम है।
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बढ़ेगा नेतृत्व: उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से आने वाले समय में अधिक संख्या में महिलाएं संसद तक पहुँचेंगी और देश के नेतृत्व में अपनी भूमिका निभाएंगी।
मुस्लिम महिलाओं को दी अलग सलाह
बिल का स्वागत करने के बावजूद, मौलाना ने मुस्लिम महिलाओं के राजनीति में प्रवेश को लेकर असहमत व्यक्त की। उन्होंने इसके पीछे वर्तमान राजनीतिक परिवेश को मुख्य कारण बताया:
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जटिल सियासत: मौलाना का मानना है कि आज का सियासी माहौल काफी जटिल और चुनौतीपूर्ण हो गया है, जो पहले जैसा नहीं रहा।
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गरिमा और सुरक्षा: उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को सलाह दी कि वे ‘इस्लामी नजरिए’ को ध्यान में रखते हुए राजनीति से दूरी बनाए रखें। उनके अनुसार, महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
“सियासत से दूर रहना बेहतर”
मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि आरक्षण लागू होने के बाद कानूनन किसी भी वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं और नेतृत्व कर सकती हैं। हालाँकि, उन्होंने व्यक्तिगत राय देते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए सियासत से दूर रहना ही उनके हित में और बेहतर होगा।
समाज में छिड़ी बहस
मौलाना के इस विरोधाभासी बयान—जहाँ एक ओर वे आरक्षण का स्वागत कर रहे हैं और दूसरी ओर एक समुदाय विशेष की महिलाओं को इससे दूर रहने की सलाह दे रहे हैं—ने नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
- रोहिताश कुमार भास्कर पत्रकार
- सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

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