बरेली: रामलीला ग्राउंड पर निगम की जीत

बरेली: नगर निगम की बड़ी जीत! हार्टमन रामलीला ग्राउंड मामले में 24 साल बाद कोर्ट का फैसला, ‘शून्य’ घोषित हुआ पट्टा

बरेली: शहर के चर्चित हार्टमन रामलीला ग्राउंड की 5646 वर्ग मीटर की बेशकीमती जमीन पर चल रहा 24 साल पुराना कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। अपर सिविल जज द्वितीय श्वेता श्रीवास्तव की अदालत ने बाल कल्याण समिति के कब्जे और पट्टे के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे नगर निगम की संपत्ति घोषित कर दिया है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “शून्य पट्टे पर कब्जा कानूनी अधिकार नहीं”

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वादी (बाल कल्याण समिति) के पक्ष में किया गया पट्टा शुरुआत से ही शून्य (Void) था। कोर्ट ने कहा कि जब पट्टा देने का अधिकार ही नहीं था, तो उस आधार पर लिया गया कब्जा किसी भी तरह का कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करता।

क्या था मामला?

यह कानूनी लड़ाई नवंबर 2002 में शुरू हुई थी। बाल कल्याण समिति की ओर से मुरारी लाल अग्रवाल ने दावा किया था कि रामलीला समिति को वर्ष 2000 में पट्टा दिया गया था। इस मामले में नगर निगम बरेली, तत्कालीन महापौर डॉ. आई.एस. तोमर और रामलीला समिति को पक्षकार बनाया गया था।

सुनवाई के दौरान सामने आए ये अहम तथ्य:

  • साक्ष्यों का अभाव: वादी पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि समिति कब रजिस्टर्ड हुई।

  • फर्जीवाड़ा: कोर्ट ने पाया कि रामलीला समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ने फर्जी और अनाधिकृत तरीके से पट्टा जारी किया था।

  • मिलीभगत: अदालत ने टिप्पणी की कि यह पट्टा स्कूल समिति और राजस्व विभाग की ‘दुरभिसंधि’ (मिलीभगत) का नतीजा प्रतीत होता है।

5646 वर्ग मीटर जमीन अब नगर निगम की

अदालत ने घोषित किया कि प्लॉट संख्या 217, 218 और 219 की कुल 5646 वर्ग मीटर भूमि पर वादी समिति का कोई विधिक अधिकार नहीं है। समिति की इस दलील को भी खारिज कर दिया गया कि उनका कब्जा पुराना है, इसलिए उन्हें हटाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि अवैध कब्जे को कानून का संरक्षण नहीं मिल सकता।

भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों को कड़ा संदेश

नगर निगम के एडवोकेट प्रमोद भटनागर ने इसे निगम की बड़ी जीत बताया है। 24 साल बाद आए इस फैसले ने साफ कर दिया है कि:

  1. सरकारी जमीन पर फर्जी पट्टों के जरिए कब्जा नहीं किया जा सकता।

  2. सामाजिक गतिविधियों की आड़ में सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा।

  3. नगर निगम अब इस बेशकीमती जमीन का उपयोग सार्वजनिक हित में कर सकेगा।


रिपोर्ट: रोहिताश कुमार, बरेली।


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