बांद्रा बॉय: मीडिया ट्रायल पर कड़ा प्रहार

‘बांद्रा बॉय’: जब सच से पहले फैसला सुना देती हैं सुर्खियां; मीडिया ट्रायल के काले चेहरे को बेनकाब करती नीरू शर्मा की दमदार फिल्म

विशेष मनोरंजन एवं फिल्म ब्यूरो: मुंबई

रिपोर्ट:  अनिल बेदाग

आज के दौर में खबरें जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से लोगों के बारे में धारणाएं भी बन जाती हैं। कई बार अदालत का अंतिम फैसला आने से पहले ही सोशल मीडिया और टीवी स्टूडियो किसी को भी दोषी या निर्दोष घोषित कर देते हैं। इसी संवेदनशील और समकालीन विषय को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर लेकर आई हैं वरिष्ठ टीवी पत्रकार नीरू शर्मा अपनी पहली निर्देशित शार्ट फिल्म ‘बांद्रा बॉय’ के साथ।

महज 21 मिनट की यह शार्ट फिल्म केवल एक कहानी नहीं लगती, बल्कि अपनी सशक्त कहानी, प्रभावी प्रस्तुति और दमदार तकनीकी पक्ष के कारण एक संपूर्ण फीचर फिल्म जैसा अनुभव कराती है।

ब्रेकिंग न्यूज़ की होड़ और खोता सच

दो दशकों तक मीडिया से जुड़ी रहीं निर्देशक नीरू शर्मा ने अपने अनुभवों को कहानी का आधार बनाते हुए यह दिखाया है कि किस तरह टीआरपी और ब्रेकिंग न्यूज़ की अंधी दौड़ में सच अक्सर पीछे छूट जाता है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म दर्शकों को लगातार यह सोचने पर मजबूर करती है कि अफवाह, मीडिया ट्रायल और जनमत किस तरह किसी बेगुनाह की पूरी जिंदगी तबाह कर सकते हैं।

फिल्म की कहानी मशहूर हस्ती सिद्धार्थ ओबेरॉय (अह्वान कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे पुलिस एक छापे के दौरान हिरासत में लेती है। हालांकि उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं होता और मेडिकल रिपोर्ट भी उसके पक्ष में आती है, लेकिन इसके बावजूद उसे फंसाने का खेल शुरू हो जाता है। उसके पिता देवराज ओबेरॉय (धर्मेंद्र गोहिल) मामले को रफा-दफा करने के लिए करोड़ों की सौदेबाजी करते हैं। इसी बीच मीडिया में एक वीडियो क्लिप लीक होती है और कहानी अप्रत्याशित मोड़ ले लेती है, जिसका क्लाइमैक्स दर्शकों को हैरान कर देता है।

कसा हुआ निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय

अभिनय के मोर्चे पर अह्वान कुमार ने अपने किरदार की उलझन, बेबसी और मानसिक संघर्ष को पर्दे पर जीवंत कर दिया है। वहीं वरिष्ठ अभिनेता धर्मेंद्र गोहिल ने अपने अनुभवी अभिनय से हर दृश्य को विश्वसनीय बनाया है। इसके अलावा लोचन बरसागड़े, यश पेडणेकर, पवन तिवारी, श्याम थोंबरे, ऐश्वर्या मनोहर और हिमांशी मंडलिया ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।

निर्देशन के स्तर पर नीरू शर्मा की यह पहली फिल्म होने के बावजूद उनकी कहानी कहने की शैली बेहद परिपक्व है। उन्होंने मीडिया की भूमिका और इमेज बिल्डिंग जैसे गंभीर विषयों को बिना उपदेशात्मक हुए सहजता से पिरोया है।

तकनीकी मजबूती और अंतरराष्ट्रीय पहचान

तकनीकी रूप से कौशल महावीर का बैकग्राउंड स्कोर, आयुष शाह की सिनेमैटोग्राफी और संदीप कुरुप की सटीक एडिटिंग फिल्म के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘New York International Women Festival’ में विजेता बनने वाली यह फिल्म साबित करती है कि दमदार विषय और ईमानदार प्रस्तुति सीमाओं से परे जाकर अपनी छाप छोड़ती है। ‘बांद्रा बॉय’ दर्शकों से यह बड़ा सवाल करती है कि क्या केवल सुर्खियों के आधार पर किसी की छवि तय कर देना उचित है?

मनोरंजन एवं फिल्म ब्यूरो: मुंबई

सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

ALL rights magazine (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)

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