सीमाओं के साथ समाज की सुरक्षा भी अहम
देश की सुरक्षा सीमाओं के साथ समाज और पर्यावरण की सुरक्षा से भी जुड़ी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
(रिपोर्ट: सोनू कुमार पत्रकार)
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्र की सुरक्षा की अवधारणा को विस्तार देते हुए कहा कि एक सशक्त भारत के लिए केवल सीमाओं की रक्षा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि देश का असली सशक्तिकरण समाज, पर्यावरण और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा में निहित है। वे शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय सेना के साथ तिरंगा पर्वतीय बचाव (TMR) के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सुरक्षा के व्यापक आयाम
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सुरक्षा के प्रति सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया:
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बहुआयामी सुरक्षा: श्री सिंह ने कहा कि एक सुरक्षित देश वह है जिसकी सीमाएं अभेद्य हों, समुदाय आत्मविश्वास से भरे हों और आपदा के समय हर जीवन की रक्षा की गारंटी हो।
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समुदायों का भरोसा: हिमालय जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में टीएमआर की भूमिका केवल रेस्क्यू ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशस्त्र बलों और स्थानीय निवासियों के बीच विश्वास का एक मजबूत सेतु है।

TMR की उपलब्धियों की सराहना
तिरंगा पर्वतीय बचाव (TMR) के एक दशक के सफर पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:
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विश्व स्तरीय प्रशिक्षण: टीएमआर ने अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High Altitude) में बचाव कार्यों के लिए विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और व्यावहारिक ज्ञान को धरातल पर उतारा है।
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सैनिकों का मनोबल: चुनौतीपूर्ण इलाकों में टीएमआर के साहस और अनुशासन से न केवल हमारे सैनिकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों के नागरिकों को भी यह सुरक्षा का अहसास कराता है कि संकट के समय वे अकेले नहीं हैं।
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निस्वार्थ सेवा: रक्षा मंत्री ने टीएमआर की निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए इसे भारतीय सेना के लचीलेपन का एक बड़ा स्तंभ बताया।
निष्कर्ष
इस कार्यक्रम के माध्यम से रक्षा मंत्री ने यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में सुरक्षा की परिभाषा में पर्यावरणीय चुनौतियों और आपदा प्रबंधन को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए जितनी सीमा सुरक्षा को दी जाती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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