स्काईरूट बनी $1.1 बिलियन की यूनिकॉर्न
अब अंतरिक्ष में भी भारत का दबदबा: स्काईरूट ने दुनिया को चौंकाया, बनी $1.1 बिलियन की यूनिकॉर्न
मुंबई (अनिल बेदाग): भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक मंच पर अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने करीब 60 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग हासिल कर 1.1 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन के साथ ‘यूनिकॉर्न’ क्लब में अपनी जगह बना ली है।
यह उपलब्धि भारतीय निजी स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जो विक्रम-1 (Vikram-1) रॉकेट की पहली कमर्शियल उड़ान से ठीक पहले आई है।
दिग्गज निवेशकों का मिला साथ
स्काईरूट की इस सफलता के पीछे दुनिया के बड़े निवेशकों का भरोसा है। इस निवेश दौर (Funding Round) का नेतृत्व शेरपालो वेंचर्स और वैश्विक निवेशक GIC ने किया। इसके अलावा, निवेश में शामिल होने वाले अन्य बड़े नाम हैं:
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ब्लैक रॉक द्वारा प्रबंधित फंड
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ग्रीनको ग्रुप के संस्थापक
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अर्कम वेंचर्स और प्लेबुक पार्टनर्स
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संघवी फैमिली ऑफिस
भविष्य की उड़ान: विक्रम-1 और विक्रम-2
इस भारी-भरकम फंडिंग का उपयोग कंपनी अपने लॉन्च ऑपरेशंस को विस्तार देने के लिए करेगी:
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कमर्शियल लॉन्च: विक्रम-1 रॉकेट के कमर्शियल लॉन्च की फ्रीक्वेंसी (गति) को बढ़ाया जाएगा।
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उन्नत तकनीक: भविष्य के शक्तिशाली रॉकेट विक्रम-2 के विकास और अनुसंधान पर आक्रामक रूप से काम शुरू होगा।
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ग्लोबल मार्केट: भारत को वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में एक किफायती और विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करना।
“निजी स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक क्षण”
स्काईरूट के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदना ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि विक्रम-1 मिशन देश को वैश्विक स्पेस मार्केट में नई पहचान दिलाएगा। उन्होंने इसे भारत के निजी स्पेस सेक्टर की मजबूती का प्रमाण बताया।
भारत की इस स्पेस क्रांति ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष के कमर्शियल बाजार में भारतीय तिरंगा और भी ऊँचाई पर लहराएगा।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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