दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण के आरोप
मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी बेअसर? एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत से दिल्ली के इन इलाकों में अवैध निर्माण जारी रहने के आरोप
(नई दिल्ली): राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण, भ्रष्टाचार और फायर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर सरकार द्वारा लगातार दिए जा रहे ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) के कड़े संदेशों के बावजूद, जमीन पर स्थिति बदलती नजर नहीं आ रही है। दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सख्त हिदायतों के बाद भी दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी रहने के गंभीर आरोप लग रहे हैं [cite: दिल्ली में अवैध निर्माण को लेकर सरकार की सख्त चेतावनियों के बावजूद कई इलाकों में निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी होने के आरोप लग रहे हैं।]।
दिल्ली के इन प्रमुख इलाकों में नियमों की अनदेखी
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं जो अवैध और अनियोजित निर्माण के गढ़ बन चुके हैं, जहां समय-समय पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें प्रशासन तक पहुंचती रहती हैं [cite: उत्तम नगर, मोहन गार्डन, ओम विहार, द्वारका मोड़, संगम विहार, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, जाफराबाद, शाहदरा और बुराड़ी जैसे इलाकों में समय-समय पर अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आती रही हैं।]:
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पश्चिमी और बाहरी दिल्ली: उत्तम नगर, मोहन गार्डन, ओम विहार, द्वारका मोड़ और बुराड़ी [cite: उत्तम नगर, मोहन गार्डन, ओम विहार, द्वारका मोड़, संगम विहार, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, जाफराबाद, शाहदरा और बुराड़ी जैसे इलाकों में समय-समय पर अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आती रही हैं।]।
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पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली: शाहदरा, सीलमपुर, जाफराबाद और मुस्तफाबाद [cite: उत्तम नगर, मोहन गार्डन, ओम विहार, द्वारका मोड़, संगम विहार, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, जाफराबाद, शाहदरा और बुराड़ी जैसे इलाकों में समय-समय पर अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आती रही हैं।]।
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दक्षिणी दिल्ली: संगम विहार [cite: उत्तम नगर, मोहन गार्डन, ओम विहार, द्वारका मोड़, संगम विहार, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, जाफराबाद, शाहदरा और बुराड़ी जैसे इलाकों में समय-समय पर अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आती रही हैं।]।
बिना सांठगांठ मुमकिन नहीं: स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा
अवैध रूप से खड़ी हो रही बहुमंजिला इमारतों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का सीधा आरोप है कि बिना दिल्ली नगर निगम (MCD) के संबंधित अधिकारियों और स्थानीय बीट स्टाफ की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर नियमों की धज्जियां उड़ाना नामुमकिन है।
जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जब स्वयं मुख्यमंत्री और गृह मंत्री स्तर से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और उनकी संपत्ति बेचकर नुकसान की वसूली करने जैसे ऐतिहासिक और कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं, तो फिर जमीनी स्तर पर भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं?
उत्तम नगर सहित कई क्षेत्रों से उठी जवाबदेही तय करने की मांग
उत्तम नगर और अन्य प्रभावित इलाकों के नागरिकों ने अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उपभोक्ताओं और स्थानीय निवासियों की सरकार से मुख्य मांगें इस प्रकार हैं [cite: उत्तम नगर सहित कई इलाकों में लोगों की मांग है कि अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।]:
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जवाबदेही हो तय: अवैध निर्माण को मूक संरक्षण देने वाले कनिष्ठ अभियंताओं (JE), सहायक अभियंताओं (AE) और अन्य संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाए।
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दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई: केवल इमारतों को आंशिक रूप से तोड़ने (Demolition) की खानापूर्ति करने के बजाय, अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों और बिल्डरों पर गैंगस्टर एक्ट और जालसाजी जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा चलाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए [cite: उत्तम नगर सहित कई इलाकों में लोगों की मांग है कि अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।]।
अब देखना यह होगा कि गृह मंत्री द्वारा जिला मजिस्ट्रेटों (DM) को दी गई सीधी अनुशासनात्मक और एफआईआर दर्ज कराने की नई शक्तियों का जमीन पर कितना असर होता है और क्या इन बेलगाम बिल्डरों तथा भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कसा पाता है या नहीं।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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