700 करोड़ के मेडिकल घोटाले में फरार
700 करोड़ रुपये का दिल्ली मेडिकल घोटाला: मुख्य आरोपी राजीव रंगीला भारत से भागा
दिल्ली सरकार के अस्पतालों में हुए 700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल सप्लाई खरीद घोटाले (Medical Procurement Fraud Case) में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की जांच के घेरे में चल रहे इस महाघोटाले का मुख्य आरोपी और फार्मास्युटिकल ट्रेडर राजीव रंगीला कथित तौर पर भारत छोड़कर विदेश भाग गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि देश से फरार होने से ठीक कुछ दिन पहले ही उसने एक स्थानीय जबरन वसूली (Extortion) और निजी दुश्मनी के मामले में अदालत से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) हासिल कर ली थी।
अग्रिम जमानत मिलते ही देश छोड़ हुआ फरार
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राजीव रंगीला दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के भीतर हुए इस करोड़ों रुपये के लिनन और मेडिकल खरीद फ्रॉड का मुख्य साजिशकर्ता है:
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निजी दुश्मनी के केस में मिली बेल: 30 जून को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर पुलिस स्टेशन में राजीव रंगीला के खिलाफ जानबूझकर चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रास्ता रोकने, चोरी और आपराधिक धमकी देने जैसे अपराधों के तहत एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इस व्यक्तिगत दुश्मनी के मामले में उसे कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई।
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एजेंसी को गच्चा देकर भागा: अग्रिम जमानत मिलने के महज कुछ ही दिनों बाद, एसीबी की शिकंजा कसने की तैयारियों के बीच वह सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर कथित तौर पर देश से बाहर भागने में कामयाब रहा।
नौकरों को बना दिया करोड़ों की शेल कंपनियों का डायरेक्टर
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने इस 700 करोड़ रुपये के घोटाले की परतें खोलते हुए अदालत के समक्ष बेहद सनसनीखेज खुलासे किए हैं। एसीबी ने कोर्ट को बताया कि:
“घोटाले को अंजाम देने के लिए जिन करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाली फर्जी (शेल) कंपनियां बनाई गई थीं, उनके कागजी डायरेक्टरों में एक डॉक्टर का घरेलू नौकर शामिल है। वहीं दूसरी कंपनी का डायरेक्टर एक ऐसा बेहद साधारण व्यक्ति है जिसके पास महज 20 वर्ग मीटर का एक छोटा सा प्लॉट है।”
तीन बड़े अधिकारियों की न्यायिक हिरासत 20 जुलाई तक बढ़ी
इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज धीरज मोर ने सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के तीन बड़े अधिकारियों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) और 14 दिनों के लिए आगे बढ़ा दी है। ये तीनों मुख्य अधिकारी अब आगामी 20 जुलाई 2026 तक सलाखों के पीछे रहेंगे:
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डॉ. वत्सला अग्रवाल – स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की पूर्व महानिदेशक (Director General)।
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नीरज चोपड़ा – सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स।
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डॉ. विनोद कुमार रंगा – सीपीए (CPA) के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस।
बिना मांग के हुई थी खरीद: ऐसे रचा गया घोटाले का ताना-बाना
एसीबी की प्राथमिकी (FIR) में दर्ज तथ्यों के अनुसार, दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए बेडशीट, तकिया कवर और अन्य लिनन सामग्रियों की खरीद के लिए ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल (e-Procurement Portal) के जरिए टेंडर जारी किए गए थे, जिसमें सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई:
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फर्जी मांग पत्र का दबाव: यह पूरी लिनन खरीद दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से आई किसी वास्तविक या जरूरी मांग के बिना ही कर ली गई। जब गोदाम भर गए, तो अस्पतालों के प्रबंधन पर बैकडेट में फर्जी मांग पत्र भेजने का भारी प्रशासनिक दबाव बनाया गया।
जबरन बेडशीट बदलने का नियम: खरीद की मात्रा (Volume) को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए अस्पतालों को विशेष निर्देश दिए गए कि वे सात अलग-अलग रंगों की बेडशीट की मांग भेजें और वॉर्डों में बेडशीट को पहले की तुलना में अधिक बार बदलें, ताकि ज्यादा से ज्यादा खपत दिखाई जा सके और करोड़ों का बिल पास कराया जा सके।
- (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
- (एडिटर (Allrights Magazine)

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