बरेली में 459वीं श्रीरामलीला: राम-हनुमान मिलन और सुग्रीव मित्रता के मंचन से भावुक हुए दर्शक, गूंजे ‘जय श्री राम’ के जयकारे
“बरेली में 459वीं ऐतिहासिक श्रीरामलीला: ‘श्री राम-हनुमान मिलन और सुग्रीव मित्रता’ के जीवंत मंचन से गूंजा रामलीला मैदान, नम हुईं श्रद्धालुओं की आँखें”
विशेष रिपोर्ट: संस्कृति एवं सनातन परंपरा (ऑल राइट्स मैगजीन)
बरेली (उत्तर प्रदेश): बरेली में श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति, चौधरी मोहल्ला के तत्वावधान में आयोजित की जा रही 459वीं ऐतिहासिक श्रीरामलीला के अंतर्गत रामलीला मैदान, बड़ा भाग में भक्ति और भ्रातृ-प्रेम से ओत-प्रोत ‘श्री राम-हनुमान मिलन और सुग्रीव से मित्रता’ के पावन प्रसंग का अत्यंत विस्तृत और भावपूर्ण मंचन किया गया। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
1. ब्राह्मण वेश में हनुमान का आगमन और आराध्य से मिलन
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माता सीता का वियोग और ऋष्यमूक पर्वत: माता सीता की खोज में व्याकुल भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी जब खोज करते हुए ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुँचे, तो किष्किंधा के राजा सुग्रीव ने उन्हें रावण का गुप्तचर समझकर भयवश हनुमान जी को उनका सत्य जानने के लिए भेजा।
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भक्त और भगवान का अलौकिक मिलन: हनुमान जी ने एक ब्राह्मण का भेष धारण कर प्रभु के समक्ष उनका परिचय पूछा। परंतु, जैसे ही प्रभु श्री राम ने करुणा भरे स्वर में अपना परिचय दिया, हनुमान जी ने तुरंत अपना वास्तविक रूप प्रकट कर दिया और अपने आराध्य के चरणों में गिर पड़े।
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गद्गद् हुए श्रद्धालु: भक्त और भगवान के इस अदभुत मिलन के दृश्य को देखकर रामलीला मैदान में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और पूरा पंडाल ‘जय श्री राम’ व ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों से गूंज उठा।
2. अग्नि को साक्षी मानकर हुई प्रभु राम और सुग्रीव की मित्रता
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कंधे पर बैठाकर ले गए हनुमान: इसके बाद हनुमान जी ने प्रभु श्री राम और लक्ष्मण जी को अपने कंधे पर बैठाकर पर्वत शिखर पर सुग्रीव के पास पहुँचाया।
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अटूट मित्रता और वचनों का आदान-प्रदान: वहाँ अग्नि को साक्षी मानकर श्री राम और सुग्रीव की अटूट मित्रता कराई गई। दोनों ने एक-दूसरे के सुख-दुख में सदैव साथ रहने का संकल्प लिया। इसके तहत प्रभु श्री राम ने सुग्रीव को बाली के भय से मुक्ति दिलाने का वचन दिया, तो वहीं सुग्रीव ने माता सीता की खोज में अपनी विशाल वानर सेना को लगाने का संकल्प लिया।
3. समिति के पदाधिकारियों के विचार और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
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सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक: समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने अपनी बाइट में कहा कि 459 वर्षों की यह ऐतिहासिक परंपरा हमारी सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जो आज की युवा पीढ़ी को निश्छल भक्ति, समर्पण और मित्रता के सच्चे धर्म की सीख देती है।
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दर्शकों का अपार उत्साह: मंत्री शशिकांत गौतम ने बताया कि राम-हनुमान मिलन के इस जीवंत दृश्य को दर्शकों ने बेहद सराहा है। वहीं, मंच प्रबंधक श्रेयांश बाजपेई ने अवगत कराया कि मैदान में उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम मिश्रा, विजय मिश्रा, महामंत्री शिव नारायण दीक्षित, धीरेंद्र शुक्ला, बृजेश प्रताप सिंह, शशिकांत गौतम, अभिषेक मिश्रा, आदित्य शुक्ला, यश चौधरी, हर्ष अग्रवाल, प्रतीक अरोरा, प्रतीक शुक्ला और मीडिया प्रभारी समर्थ गौतम सहित तमाम विशिष्ट जन व पदाधिकारी गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे।
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