बरेली विकास प्राधिकरण का बड़ा तोहफा

“बरेली का होगा कायाकल्प: बीडीए बोर्ड की 96वीं बैठक में सप्तनाथ ईको सिटी, विज्ञान पार्क और कैनाल फ्रंट जैसी मेगा परियोजनाओं को हरी झंडी”

बरेली (उत्तर प्रदेश): बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने शहर के सुनियोजित, आधुनिक और हरित विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आयुक्त एवं बीडीए बोर्ड के अध्यक्ष शंभू कुमार की अध्यक्षता में आयोजित प्राधिकरण की 96वीं बोर्ड बैठक में शहर के भविष्य को संवारने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है।

बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय द्वारा प्रस्तुत इन विकास योजनाओं से न केवल आवासीय सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बरेली एक नए मुकाम पर पहुंचेगा।

1. 11 सेक्टरों में विकसित होगी महत्वाकांक्षी ‘सप्तनाथ ईको सिटी’

  • विशाल दायरा: पीलीभीत बाइपास क्षेत्र में 267.14 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित ‘सप्तनाथ ईको सिटी’ को शहर के भविष्य के सबसे बड़े आवासीय विस्तार के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • आवासीय भूखंड: इस हाई-टेक ईको सिटी में कुल 11 सेक्टर प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके अंतर्गत 4726 आधुनिक आवासीय भूखंड विकसित किए जाएंगे। इससे शहर में आवास की मांग को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।

2. बोर्ड बैठक में मंजूर अन्य प्रमुख मेगा परियोजनाएं

बैठक में विस्तृत मंथन के बाद जिन अन्य प्रमुख प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है, वे इस प्रकार हैं:

  • विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला (Science Park & Planetarium): युवाओं और विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने तथा खगोल विज्ञान की शिक्षा को रोचक बनाने के लिए शहर में आधुनिक विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला की स्थापना की जाएगी।

  • ग्रेटर बरेली कैनाल फ्रंट (Canal Front): शहर के सौंदर्यीकरण और नागरिकों के घूमने के लिए हरित व आकर्षक सार्वजनिक स्थल विकसित करने के उद्देश्य से कैनाल फ्रंट परियोजना को मंजूरी दी गई है।

  • ओमैक्स इंटीग्रेटेड टाउनशिप (Omaxe Integrated Township): आधुनिक सुविधाओं से लैस इस टाउनशिप के जरिए शहर में नियोजित शहरीकरण और उच्च स्तरीय नागरिक सुविधाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।

3. विकास और पर्यावरण का अनूठा संतुलन

इन सभी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य शहर में आवास, शिक्षा, पर्यावरण और आधारभूत सुविधाओं का एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। हरित सार्वजनिक स्थलों के विकास से जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

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