बाराबंकी में वन माफियाओं के हौसले बुलंद
“बाराबंकी: देवा व बदोसराय थाना क्षेत्र में अवैध वनों की कटाई का बड़ा खेल, 10 पेड़ों के परमिट पर 11वें पेड़ पर चला आरी; ट्रांजिट परमिट और लकड़ी ढुलाई पर उठे गंभीर सवाल”
विशेष जांच रिपोर्ट: Ragvendra Singh (ऑल राइट्स मैगजीन)
बाराबंकी (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देवा और बदोसराय थाना क्षेत्रों से पर्यावरण संरक्षण और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों और साक्ष्यों के अनुसार, क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का खेल बेखौफ जारी है। हैरानी की बात यह है कि कागजों में तय नियमों और परमिट की आड़ में तय सीमा से अधिक पेड़ों को काटा जा रहा है, और लकड़ी की ढुलाई बिना वैध ट्रांजिट परमिट (TP) के धड़ल्ले से की जा रही है।
1. 10 पेड़ों के परमिट की आड़ में 11वें पेड़ की अवैध कटाई
-
नियमों की खुली धज्जियां: वन नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी या चिन्हित भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए निर्धारित संख्या और प्रजाति का वन विभाग से अनुमति पत्र (Permit) लेना अनिवार्य होता है।
-
फर्जीवाड़ा और ओवर-कटिंग: आरोप है कि देवा और बदोसराय थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिंडिकेटनुमा लोग 10 पेड़ों की कटाई का वैध परमिट लेकर उसकी आड़ में 11वें या उससे अधिक पेड़ों पर आरी चलवा रहे हैं। परमिट की वैधता की आड़ में आसपास के अन्य बहुमूल्य और हरे पेड़ों को भी अवैध रूप से साफ किया जा रहा है।
2. बिना ट्रांजिट परमिट (TP) के लकड़ी की अवैध ढुलाई
-
परिवहन नियमों की अनदेखी: उत्तर प्रदेश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक लकड़ी ले जाने के लिए वन विभाग का ट्रांजिट परमिट होना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लकड़ी तस्करों या अवैध कटाई से जुड़ी नहीं है।
-
रात के अंधेरे में परिवहन: स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि बिना किसी वैध ट्रांजिट परमिट के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों के माध्यम से काटी गई लकड़ी को आरा मशीनों और अन्य जनपदों तक पहुंचाया जा रहा है। रास्ते में सुरक्षा चौकियों और थानों के पास से यह वाहन गुजरते हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
3. स्थानीय पुलिस और वन विभाग की भूमिका पर सवाल
-
सांठगांठ के आरोप: देवा और बदोसराय क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे इस अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि बिना स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के इस तरह खुलेआम पेड़ों की कटाई और ट्रकों से ढुलाई संभव नहीं है।
-
पर्यावरण को भारी नुकसान: अंधाधुंध कटाई से जहां एक ओर क्षेत्र का हरा-भरा आवरण समाप्त हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के मैदानी कर्मचारी इस पूरे खेल पर या तो आंखें मूरे बैठे हैं या उनकी संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ पर्यावरण संरक्षण, वन माफियाओं के अवैध नेटवर्क और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ी इस खबर पर पैनी नजर बनाए हुए है तथा इस मामले में उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग करती है।
आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों से सशक्त हो रहे गाँव, मातृ-शिशु पोषण पर विशेष जोर
