या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता: भय और नकारात्मकता का नाश करने वाली माँ कालरात्रि को शत-शत नमन
“जय माँ कालरात्रि: दुष्टों का संहार करने और भक्तों को अभयदान देने वाली माँ कालरात्रि की पावन आराधना”
नई दिल्ली: नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। दुष्ट शक्तियों और नकारात्मकता का विनाश करने वाली माँ कालरात्रि अपने भक्तों को हमेशा अभय और आरोग्य प्रदान करती हैं। उनके चरणों में समस्त श्रद्धालु शत-शत नमन करते हैं।
1. माँ कालरात्रि का दिव्य स्वरूप और महिमा
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भय और बाधाओं का नाश: माँ कालरात्रि का यह रूप अत्यंत तेजोमय और कल्याणकारी है। मान्यता है कि इनकी आराधना करने से जीवन से हर प्रकार का भय, संकट, बाधाएँ और नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।
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सत्य और निर्भयता का मार्ग: माँ अपने भक्तों को निर्भय बनाकर सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
2. पावन श्लोक और स्मरण
माँ कालरात्रि के इस दिव्य श्लोक के स्मरण मात्र से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है:
सुखप्रसन्नवदनां स्मेराननसरोरुहाम्। एवं सञ्चियन्तयेत्कालरात्रिंसर्वकामसमृद्धिदाम्॥
अर्थात: जिनके मुख पर प्रसन्नता और मुस्कान कमल के समान सुशोभित है, तथा जो सभी मनोकामनाओं और समृद्धि को देने वाली हैं, ऐसी माँ कालरात्रि का स्मरण करना चाहिए।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ की ओर से सभी पाठकों को माँ कालरात्रि के पावन पर्व की अनंत शुभकामनाएं। माता रानी सभी के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार करें।
