‘नारे नहीं, महिलाओं को अधिकार और सम्मान चाहिए’
‘नारे नहीं, अधिकार और सम्मान चाहिए’: राहुल गांधी के दृष्टिकोण को लेकर भाजपा सरकार पर विपक्ष का हमला
नई दिल्ली: देश में महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और नारों की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘महिला शक्ति वंदन’ की बातें तो बड़ी-बड़ी की जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
‘दया या संरक्षण नहीं, बराबरी की हकदार हैं महिलाएं’: राहुल गांधी का विजन विपक्ष ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और जननेता राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण संबंधी दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। राहुल गांधी के विजन को सामने रखते हुए कहा गया कि महिलाएं समाज में किसी की दया या संरक्षण की मोहताज नहीं हैं, बल्कि वे पुरुषों के समान पूर्ण बराबरी की हकदार हैं।
विपक्ष के मुख्य बिंदु:
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आवाज़ और आज़ादी की गारंटी: महिलाओं की आवाज़, उनकी स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की हर स्तर पर सुरक्षा होनी चाहिए।
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निर्णय लेने का अधिकार: महिलाओं को अपने जीवन और करियर से जुड़े फैसले लेने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए।
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खोखले नारों के खिलाफ: देश की महिलाओं को केवल राजनीतिक नारों की जरूरत नहीं है, बल्कि वास्तविक अधिकार और सम्मान मिलना आवश्यक है।
सड़क से संसद तक महिला सुरक्षा का मुद्दा गर्माया हाल ही में सामने आईं विभिन्न घटनाओं, विशेषकर महिला पत्रकारों व छात्राओं से जुड़ी प्रशासनिक ढिलाई का हवाला देते हुए विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। विपक्ष ने मांग की है कि महिलाओं को केवल चुनावी योजनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें नीति-निर्माण और शासन में बराबर का हिस्सेदार बनाया जाए और कानून-व्यवस्था को इतना दुरुस्त किया जाए कि हर महिला सुरक्षित महसूस कर सके।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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