क्यों खास है नवरात्रि का तीसरा दिन: जानिए साहस, शांति और दिव्य शक्ति की प्रतीक माँ चंद्रघंटा की महिमा
“क्यों खास है नवरात्रि का तीसरा दिन? जानिए मां चंद्रघंटा की महिमा और उसका आध्यात्मिक महत्व”
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का हर एक दिन अपने आप में विशेष और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण होता है, लेकिन नवरात्रि का तीसरा दिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन नवदुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि का यह तीसरा दिन क्यों खास है और इसका क्या महत्व है:
1. मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र
-
माँ चंद्रघंटा के विग्रह और स्वरूप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके मस्तक पर घंटे (बेल) के आकार का अर्ध-चंद्र (हाफ मून) सुशोभित होता है।
-
इसी अलौकिक आकार के कारण उन्हें ‘चंद्रघंटा’ के नाम से जाना जाता है। उनका यह स्वरूप भक्तों के लिए शीतलता और सकारात्मकता का प्रतीक है।
2. साहस, शांति और दिव्य शक्ति का प्रतीक
-
नवरात्रि का तीसरा दिन साधकों के भीतर साहस (करेज), शांति और दिव्य शक्ति का संचार करने वाला माना जाता है।
-
ऐसा विश्वास है कि माँ चंद्रघंटा की आराधना करने से व्यक्ति के अंदर से भय और डर हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है और वह हर कठिन परिस्थिति का सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ करने में सक्षम होता है।
3. दुःख और कष्टों का निवारण
-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा अपने भक्तों के सभी कष्टों, दुखों और बाधाओं को तुरंत दूर करती हैं।
-
उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र इस बात के प्रतीक हैं कि वह बुराई और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
इसलिए नवरात्रि का यह तीसरा दिन मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति, शांति और निर्भयता का वरदान देने वाला परम पवित्र दिन माना जाता है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ धार्मिक और सांस्कृतिक महापर्वों से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी निष्पक्षता के साथ अपने पाठकों तक पहुँचाती रहेगी।
