साइकिल को बढ़ावा देने की आवश्यकता

संपादकीय: पर्यावरण और घरेलू अर्थव्यवस्था दोनों के लिए साइकिल को बढ़ावा देने की आवश्यकता

(वैश्विक समूह संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह एवं सलाहकार संपादक, नई दुनिया व गौड़सन्स टाइम्स)

आज का युग तीव्र गति, आधुनिक तकनीक और सुख-सुविधाओं का युग है। मोटरसाइकिल, कार और अन्य मोटर चालित वाहन हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी लोग अब वाहनों पर निर्भर हो गए हैं। सुविधाओं के इस विस्तार ने जीवन को आसान तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही बढ़ता वायु प्रदूषण, ईंधन की भारी खपत, विदेशी मुद्रा पर बढ़ता बोझ, स्वास्थ्य समस्याएं और घरेलू बजट पर बढ़ता दबाव जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं [cite: सुविधाओं के इस विस्तार ने जीवन को आसान अवश्य बनाया है, लेकिन इसके साथ अनेक नई समस्याएं भी पैदा हुई हैं। बढ़ता वायु प्रदूषण, ईंधन की बढ़ती खपत, विदेशी मुद्रा पर बढ़ता बोझ, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि और घरेलू बजट पर बढ़ता दबाव आज हमारे सामने गंभीर चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।]। इन सभी बहुआयामी समस्याओं का एक सरल, सस्ता और व्यावहारिक समाधान साइकिल के व्यापक उपयोग में छिपा हुआ है।

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा की बचत

भारत विश्व के सबसे बड़े पेट्रोलियम आयातक देशों में से एक है और देश को अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है:

  • अर्थव्यवस्था पर बोझ: हर वर्ष ईंधन आयात के लिए लाखों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर आम नागरिकों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

  • ईंधन की बड़ी बचत: भारत के शहरों में बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन 5 से 10 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। यदि इस छोटी दूरी के लिए मोटरसाइकिल या कार के स्थान पर साइकिल का उपयोग किया जाए, तो प्रतिदिन लाखों लीटर ईंधन की बचत हो सकती है [cite: यह दूरी साइकिल से आसानी से तय की जा सकती है। यदि लाखों लोग प्रतिदिन मोटरसाइकिल या कार के स्थान पर साइकिल का उपयोग करें तो प्रतिदिन लाखों लीटर ईंधन की बचत संभव है।]।

  • विकास कार्यों में उपयोग: तेल आयात में बचने वाले इस राष्ट्रीय धन का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है [cite: इसका सीधा लाभ देश की विदेशी मुद्रा बचत के रूप में सामने आएगा। जो धन विदेशों से तेल खरीदने में खर्च होता है, उसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।]।

घूमेगा साइकिल का पहिया, तो सुधरेगा घरेलू बजट

साइकिल का एक बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है:

  • रखरखाव का न्यूनतम खर्च: आज एक मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट का बड़ा हिस्सा पेट्रोल, सर्विसिंग, इंश्योरेंस और मरम्मत पर खर्च होता है [cite: आज एक मध्यमवर्गीय परिवार के मासिक बजट का बड़ा हिस्सा पेट्रोल और वाहन रखरखाव पर खर्च होता है। पेट्रोल, सर्विसिंग, इंश्योरेंस, मरम्मत और अन्य खर्च मिलाकर यह राशि हजारों रुपये तक पहुंच जाती है।]। इसके विपरीत, साइकिल के लिए न तो पेट्रोल की आवश्यकता होती है और न ही किसी महंगे रखरखाव की [cite: इसके विपरीत साइकिल का रखरखाव अत्यंत सस्ता है। इसमें न पेट्रोल की आवश्यकता होती है, न इंजन ऑयल की और न ही महंगे रखरखाव की।]।

  • भविष्य के लिए बचत: दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करके कोई भी व्यक्ति वर्षभर में हजारों रुपये की बचत कर सकता है, जिसे परिवार की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी भविष्य की आवश्यकताओं पर खर्च किया जा सकता है [cite: यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन के छोटे-छोटे कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करता है तो वह वर्षभर में हजारों रुपये की बचत कर सकता है। यह बचत परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की आवश्यकताओं पर खर्च की जा सकती है।]।

बेहतर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय उत्पादकता में वृद्धि

बदलती जीवनशैली के कारण आज मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और तनाव जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिन पर परिवारों का बड़ा खर्च होता है [cite: आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और तनाव जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। इन बीमारियों के उपचार पर परिवारों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।]।

  • उत्कृष्ट व्यायाम: नियमित साइकिल चलाना एक बेहतरीन व्यायाम है, जो हृदय को मजबूत बनाता है, रक्त संचार बेहतर करता है, वजन नियंत्रित रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है [cite: नियमित साइकिल चलाना एक उत्कृष्ट व्यायाम है। इससे शरीर के लगभग सभी अंग सक्रिय रहते हैं। हृदय मजबूत होता है, रक्त संचार बेहतर होता है, वजन नियंत्रित रहता है और मानसिक तनाव कम होता है।]।

  • चिकित्सा संसाधनों की मांग में कमी: जब समाज का एक बड़ा वर्ग स्वस्थ रहेगा, तो अस्पतालों और दवाइयों पर होने वाला खर्च कम होगा [cite: यदि समाज का बड़ा वर्ग नियमित रूप से साइकिल चलाने लगे तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। जब लोग स्वस्थ रहेंगे तो अस्पतालों, दवाइयों और चिकित्सा सेवाओं पर होने वाला खर्च भी कम होगा।]। इससे देश द्वारा आयात किए जाने वाले महंगे चिकित्सा उपकरणों और दवाइयों की मांग भी कम होगी, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा [cite: भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में चिकित्सा उपकरणों, उन्नत मशीनों और अनेक दवाइयों का आयात करता है। यदि लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा तो गंभीर बीमारियों की संख्या कम होगी और चिकित्सा संसाधनों की मांग भी अपेक्षाकृत कम होगी। इसका अप्रत्यक्ष लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा।]।

  • मानव पूंजी की उत्पादकता: स्वस्थ नागरिक ही राष्ट्र की असली पूंजी हैं। एक स्वस्थ और ऊर्जावान व्यक्ति की कार्यक्षमता बेहतर होती है, जिससे उद्योगों, कृषि और सेवा क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ती है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है [cite: एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक ऊर्जा के साथ कार्य कर सकता है। उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है और वह अधिक उत्पादक होता है। जब लाखों लोग स्वस्थ होंगे तो उद्योगों, कृषि, सेवा क्षेत्र और अन्य आर्थिक गतिविधियों में उनकी उत्पादकता बढ़ेगी। इससे राष्ट्रीय आय में वृद्धि होगी और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।]।

पर्यावरण संरक्षण और सुगम यातायात

  • शून्य प्रदूषण (Zero Emission): साइकिल पूरी तरह से एक पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधन है, जिससे किसी प्रकार का धुआं या प्रदूषण नहीं होता। शहरों में इसका उपयोग बढ़ने से वायु प्रदूषण के संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है [cite: आज दुनिया के अनेक शहर वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। भारत के कई बड़े शहर भी प्रदूषित हवा के कारण स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। यदि छोटी दूरी की यात्राओं के लिए साइकिल का उपयोग बढ़े तो वाहनों की संख्या कम होगी और वायु प्रदूषण में कमी आएगी।]।

  • ध्वनि प्रदूषण और जाम से मुक्ति: साइकिल लगभग निःशब्द (बिना आवाज के) चलती है, जिससे शहरों का शोर कम होता है [cite: साइकिल ध्वनि प्रदूषण को भी कम करने में सहायता करती है। मोटर चालित वाहनों से निकलने वाला शोर शहरी जीवन की एक बड़ी समस्या बन चुका है। साइकिल लगभग निःशब्द चलती है और शहरों को अधिक शांत तथा रहने योग्य बनाने में योगदान देती है।]। इसके अलावा, साइकिल कम जगह घेरती है, जिससे महानगरों में प्रतिदिन लगने वाले घंटों के ट्रैफिक जाम और समय की बर्बादी से राहत मिल सकती है [cite: यातायात जाम की समस्या भी साइकिल के बढ़ते उपयोग से काफी हद तक कम की जा सकती है। महानगरों और बड़े शहरों में लाखों लोग प्रतिदिन घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं। इससे समय, ईंधन और ऊर्जा तीनों की बर्बादी होती है। साइकिल कम जगह घेरती है और यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने में सहायता करती है।]।

“महंगी कारों और मोटरसाइकिलों की तुलना में साइकिल समाज के हर वर्ग के लिए आर्थिक रूप से सुलभ है। यह न केवल निम्न और मध्यम आय वर्ग को गतिशीलता प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक समानता को भी बढ़ावा देती है”

सरकारी प्रयास और मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता

विश्व के कई विकसित देशों ने अपने शहरी नियोजन (अर्बन प्लानिंग) में विशेष साइकिल ट्रैक और सुरक्षित साइकिल पार्किंग बनाकर ‘साइकिल संस्कृति’ को बढ़ावा दिया है [cite: विश्व के अनेक विकसित देशों ने साइकिल संस्कृति को बढ़ावा दिया है। वहां विशेष साइकिल ट्रैक बनाए गए हैं, साइकिल उपयोग करने वालों को प्रोत्साहन दिया जाता है और शहरी नियोजन में साइकिल को प्राथमिकता दी जाती है।]। भारत में भी ऐसी ही साइकिल-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करने की आवश्यकता है [cite: भारत भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है। सरकारों को साइकिल-अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।]। सुरक्षित साइकिल लेन, सार्वजनिक साइकिल साझा व्यवस्था और स्कूलों-दफ्तरों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए [cite: सुरक्षित साइकिल लेन, साइकिल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल साझा व्यवस्था और जागरूकता अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में भी साइकिल उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।]।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समाज को साइकिल को ‘गरीबी का प्रतीक’ मानने की संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलना होगा। आज दुनिया भर में जागरूक, संपन्न और शिक्षित लोग इसे एक आधुनिक और जिम्मेदार जीवनशैली के प्रतीक के रूप में गर्व से अपना रहे हैं [cite: वास्तव में साइकिल आधुनिक और जिम्मेदार जीवनशैली का प्रतीक है। आज दुनिया के अनेक संपन्न और शिक्षित लोग पर्यावरण तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण साइकिल का उपयोग कर रहे हैं। हमें भी साइकिल को सम्मान और गर्व के साथ अपनाना चाहिए।]।

निष्कर्ष:

साइकिल केवल एक वाहन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वस्थ भारत का एक सशक्त अभियान है [cite: इसलिए समय की मांग है कि साइकिल को केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वस्थ भारत के अभियान के रूप में देखा जाए।]। देश के करोड़ों नागरिक यदि दैनिक जीवन में इसका संकल्प लें, तो एक मजबूत परिवार, स्वस्थ समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण सुनिश्चित है [cite: यदि भारत के करोड़ों नागरिक प्रतिदिन की छोटी यात्राओं के लिए साइकिल को अपनाने का संकल्प लें तो इसका प्रभाव केवल सड़कों पर नहीं दिखाई देगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक रूप से परिलक्षित होगा। साइकिल का पहिया जितना अधिक घूमेगा, उतना ही मजबूत परिवार, स्वस्थ समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होगा।]


रिपोर्ट: सौरभ कुमार, शेखपुरा (बिहार)

(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 एडिटर (Allrights Magazine)


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